3 दिसंबर तक बुधादित्य योग, कुंडली में किस घर में इस युति का क्या मिलता है फल

Budhaditya Yoga
अनिरुद्ध जोशी| Last Updated: मंगलवार, 29 नवंबर 2022 (09:00 IST)
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Budhaditya yog 2022 : 13 नवंबर को बुध ग्रह ने और 16 नवंबर को सूर्य ग्रह ने वृश्चिक राशि में प्रवेश किया था। सूर्य और बुध की युति को ही कहते हैं। 3 दिसंबर तक बुध ग्रह वृश्‍चिक राशि से निकलकर धनु राशि में प्रवेश कर जाएंगे तब तक बुधादित्य योग रहेगा। इस योग को कुंडली में बहुत शुभ माना जाता है। आओ जानते हैं कि क्या है इस योग का फल।

बुधादित्य योग क्या है : सूर्य और बुध की युति को बुद्धादित्य योग कहते हैं। जब यह दोनों ग्रह किसी एक ही राशि में स्थित होकर गोचर करने लगते हैं तो इसे बुधादित्य योग कहते हैं। 12 ही राशियों और 12 ही भावों में इसका अलग अलग फल होता है। आओ जानते हैं 12 भावों में इसका फल।

बुधादित्य योग का शुभ फल | budhaditya yog ka 12 bhavo me fal:

लग्न या प्रथम भाव : इस भाव में जातक की नेतृत्व क्षमता बढ़ाता है। वह किसी भी क्षेत्र में सफल होने की क्षमता रखता है। मान सम्मान प्राप्त करता है।

दूसरा भाव : आर्थिक रूप से जातक को मजबूत बनाता है। ससुराल वालों से मदद मिलती है। पैतृक संपति प्राप्त होती है। कुशल वक्ता और विचारक बनाता है। शिक्षा के क्षेत्र में भी जातक उन्नति करता है।

तीसरा भाव : जातक को पराक्रमी और परिश्रमी बनाता है। बौद्धिक क्षमता का विकास करता है। रचनात्मक कार्यों में रुचि रहती है। भाई और बहनों का सहयोग प्राप्त होता है। व्यापार में सफलता मिलती है।
चौथा भाव : भव्य, सुंदर बंगले के साथ ही जातक वाहन सुख भोगता है। जातक अपने कार्यों में कुशल होता है और विदेश में भ्रमण भी करता है। उसकी सुख एवं सुविधाओं में विस्तार होता है।

पांचवां भाव : शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में उन्नति करता है। कला और अध्यात्म में रुचि रखता है। खोजी बुद्धि का होता है और ज्ञान के दम पर सफलता अर्जित करता है।
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छठा भाव : जातक अपने शत्रुओं को परास्त करने में सफल होता है। रोगों से लड़ने की उसमें क्षमता होती है। योजना बनाने और कार्य करने में वह कुशल होता है। वाणी का धनी और बुद्धिमान होता है।

सातवां भाव : दांपत्य जीवन में वह सामंजस्यता नहीं बना पाता है। साझेदारी के व्यापार में सफल होने की संभावना रहती है। समाज में मान सम्मान प्राप्त करने में सफल होता है। नौकरी में भी अच्छा प्रदर्शन करता है।

आठवां भाव : धर्म कर्म के कार्यों में रुचि बढ़ जाती है। रहस्यमय विद्याओं के प्रति आकर्षित होता है। पैतृक संपत्ति पा सकता है। वाद विवाद में निपुण जातक गंभीर तरह के कार्य करता है। कई बार इससे नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

नवम भाव : यहां जातक को भाग्य का सहरा मिलता है। पिता और वरिष्ठों के सहयोग से सफलता अर्जित करता है। धर्म कर्म के कार्यों में बढ़ चढ़कर भाग लेता है। भूमि, भवन और वाहन का सुख मिलता है।

दसम भाव : जातक कार्यक्षेत्र में अच्छी उन्नति करता है और सरकार की ओर से लाभ पाता है। व्यापार में भी उन्नति करता है। यात्राएं भी अधिक होती है। अनेक क्षेत्रों में सफलता अर्जित करने में कामयाब होता है।
ग्यारहवां भाव : जातक आर्थिक क्षेत्र में उन्नति करता है। लंबी यात्राएं करता रहता है। भाई बहनों का साथ मिलता है। पद और पुरस्कार अर्जित करने में भी कामयाब होता है।

बारहवां भाव : जातक जितनी कमाई करता है उतना ही खर्च भी कर देता है। बचत नहीं हो पाती है। विदेश से लाभ कमाता है। कई बार आर्थिक नुकसान भी उठान पड़ता है, लेकिन वह सब मैनेज कर लेता है।



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