बुधवार को देखिए अंकों का चमत्कार

बनने वाला है ईश्वरीय संयोग

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बुधवार, को अंकों की दुनिया में एक रोमांचकारी घटना घटित होगी, जब घड़ी की सुई 5 बजकर 6 मिनट और 7 सेकेंड पर होगी। वैसे तो घड़ी की सुई यह आँकड़ा प्रतिदिन बताती है, लेकिन 8 सितंबर 2010 की बात ही अलग होगी। इस दिन इस वक्त पाँच से 10 तक के सभी नंबर एक क्रम में आ जाएँगे।

ज्योतिषी डॉ. दीपक शर्मा के अनुसार इस दिन जब 5 बजकर 6 मिनट और 7 सेकंड हो उस समय तारीख होगी 8, महिना होगा 9 और वर्ष होगा 10वाँ। इस प्रकार अंकों का एक निर्मित होगा, जो सालों बाद दिखाई देता है। यदि इस दिन समय और तारीख को एक साथ लिखा जाए तो अंकों का उल्लेख इस प्रकार होगा 05. 06. 07. 08. 09. 10।

डॉ. शर्मा ने बताया कि 5 का स्वामी बुध है और इस दिन बुधवार भी है। इसी तरह 6 अंक का स्वामी शुक्र, 7 अंक का स्वामी वरूण, 8 अंक का स्वामी शनि, 9 अंक का स्वामी मंगल और 10 अंक यानि एक अंक के स्वामी सूर्यदेव हैं। लिहाजा 8 सितंबर को इन सभी ग्रहों की कृपा प्राप्त होगी।
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इस दिन पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र एवं भाद्रपद अमावस्या भी है, इसलिए शुभ कार्यों के लिए यह दिन महत्वपूर्ण रहेगा। शर्मा के अनुसार अंकों के इस अनूठे संयोग का सर्वाधिक चमत्कारिक पहलू यह है कि यदि इन सभी अंकों को एक साथ जोड़ा जाए तो इन अंकों का भी 09 आ रहा है। इस अंक को ज्योतिष और अंक शास्त्र में ईश्वरीय अंक माना गया है, क्योंकि एक से लेकर 8 तक के सभी अंक 9 में समाहित हैं। लिहाजा इस दिन ईश्वरीय कृपा प्राप्त करने का महत्वपूर्ण दिन रहेगा।
दिखेंगे पाँच से लेकर 10 तक के अंक अपने क्रम में -
के आधार पर 05. 06. 07. 08. 09. 10 का योग 45 होता है और इसका मूलांक 09 है। यदि मूल ग्रहों की संख्या पर विचार किया जाए तो नवग्रह है और जन्म पत्रिका में 09वाँ भाव भी सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। कुंडली का 9वाँ भाव भाग्य और धर्म से संबंधित है। इसलिए अंकों में 9 का मूलांक भी ईश्वरीय कृपा का प्रतीक है, जिसे भाग्यजनित सफलता का कारक माना जाता है।
उन्होंने बताया कि 9 अंक का न केवल धार्मिक या ज्योतिषीय महत्व है, बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है। हमारे ग्रहों की कक्षा 360 डिग्री की है, जिसका मूलांक 9 ही आता है। मनुष्य एक दिन 21 हजार 600 बार श्वांस लेता है, इसे जोड़ने पर भी मूल अंक 9 ही आता है।

मूलांक की माया :- ग्रहों की संख्या नौ है। रत्नों की संख्या नौ है। माँ दुर्गा के नौ रूप हैं। महाभारत में 18 पर्व हैं, जिसका मूल अंक नौ है। गीता में 18 अध्याय हैं, जिसका मूलांक भी नौ है। मंत्र जाप की माला में 108 मनके हैं, जिसका मूलांक भी नौ हैं।
विक्रमादित्य और सम्राट अकबर के दरबार में नौ रत्न थे। भारतीय इतिहास में नौलखा हार की कहानी प्रसिद्घ है।



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