नजारा वेलेंटाइन डे का...

बदल गई है परिभाषा

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शहर के रेस्टॉरेन्ट और जगह-जगह हाथों में फूल और गिफ्ट लिए हुए नवयुवकों की भीड़।

हर चौराहे पर उत्साहपूर्वक किसी का इंतजार करते लड़के-लड़कियाँ। यह नजारा होता है वेलेंटाइन डे यानी कि प्रेम दिवस का।

इस दिन शहर में अलग ही माहौल दिखाई देता है। वेलेंटाइन डे यानी एक-दूसरे के प्रति दिल में छिपे प्यार के इजहार का दिन। युवाओं को तो इस दिन का खास तौर पर इंतजार रहता है।

इस दिन आप अपने प्रेमी से अपने दिल की बात कह सकते हैं। वेलेंटाइन डे की शुरुआत हुई थी प्रेम के लिए बलि देने वाले एक पादरी सेंट वेलेंटाइन से। उन्होंने दो प्रेमियों की शादी चुपचाप करवा दी और जब लोगों को इस बात का पता चला तो उन्हें फाँसी दे दी गई।

बस प्रेम के लिए अपनी बलि देने वाले उसी महान संत को अपनी श्रद्धांजलि देने के लिए पूरी दुनिया में वेलेंटाइन डे मनाया जाता है। आज सारी दुनिया के युवाओं के बीच यह एक खास अवसर बन गया है।
  प्रेम का प्रतीक यह दिवस बस यहीं तक सीमित रह गया है। आज के युवाओं ने प्रेम की परिभाषा भी बदल दी है। हालाँकि यह पाश्चात्य संस्कृति की देन है लेकिन जब हम इसे अपना ही रहे हैं तो क्यों न इसे सही अर्थों में ही अपनाया जाए।      


लेकिन इस प्रेम दिवस को आज के युवाओं ने सिर्फ प्यार के इजहार के दिन तक सीमित कर दिया है। आज के युवाओं के लिए वेलेंटाइन डे यानी वह दिन जब वे उपहार दे और ले सकें, खूब घूम-फिर सकें।

इस दिन यह कामकाज जोर-शोर से चलता है। एक-दूसरे को उपहार देकर नौजवानों की यह दोस्ती शायद ही उनके अगले वेलेंटाइन डे तक कायम रहती हो।

उनमें कोई प्रेम नहीं रहता बस वेलेंटाइन डे मनाने के लिए उन्हें जरूरत होती है किसी की, जिसे वे उपहार दे सकें और साथ घूम सकें। और फिर अगले वेलेंटाइन पर कोई नया साथी उन्हें मिल जाता है।

प्रेम का प्रतीक यह दिवस बस यहीं तक सीमित रह गया है। आज के युवाओं ने प्रेम की परिभाषा भी बदल दी है। हालाँकि यह पाश्चात्य संस्कृति की देन है लेकिन जब हम इसे अपना ही रहे हैं तो क्यों न इसे सही अर्थों में ही अपनाया जाए।
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