चीन ने खत्म की जापान की बादशाहत

नई दिल्ली| भाषा| पुनः संशोधित मंगलवार, 2 नवंबर 2010 (17:18 IST)
ओलिम्पिक खेलों में अमेरिका से आगे निकलकर खेलों की दुनिया में राज करने वाले चीन ने इसकी शुरुआत से 28 साल पहले दिल्ली में नौवें एशियाई खेलों में जापान की बादशाहत समाप्त करके की थी।

असल में दूसरी बार दिल्ली में हुए इन महाद्वीपीय खेलों ने एशिया ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभाव डाला था। 19 नवंबर से चार दिसंबर 1982 के बीच हुए इन खेलों में 33 देशों के 4595 खिलाड़ियों ने भाग लिया था।

यह पहले एशियाई खेल थे जो एशियाई ओलिम्पिक परिषद (ओसीए) की छत्रछाया में आयोजित किए गए थे। चीन इन खेलों में नई एशियाई खेल शक्ति के रूप में उभरा था।
चीन ने 61 स्वर्ण, 51 रजत और 41 काँस्य पदक सहित कुल 153 पदक हासिल करके जापान की पिछले आठ एशियाई खेलों से चली आ रही बादशाहत समाप्त कर दी थी। जापान ने भी 153 पदक जीते थे लेकिन उसके स्वर्ण पदकों की संख्या 57 थी।

मेजबान भारत ने भी पदक बटोरने में कोताही नहीं बरती थी और कुल 57 पदक जीते थे, जो एशियाई खेलों में अब तक का उसका सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड भी है।
भारत ने 13 स्वर्ण, 19 रजत और 25 काँस्य पदक लेकर पाँचवाँ स्थान हासिल किया था। लेकिन इस अच्छे प्रदर्शन के बावजूद भारतीयों का दिल राष्ट्रीय स्टेडियम में टूट गया था जहाँ भारतीय हॉकी टीम फाइनल में अपने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से 1-7 से बुरी तरह हार गई थी। इन खेलों में पहली बार महिला हॉकी को भी शामिल किया गया था जिसमें भारत सोने का तमगा जीतने में सफल रहा था।
भारत के लिए एथलेटिक्स में पुरुष वर्ग में बहादुर सिंह (गोला फेंक), चार्ल्स बोरोमियो (800 मीटर) और चाँदराम (20 किमी पैदल चाल) ने सोने का तमगे जीते थे। एम डी वालसम्मा ने महिला वर्ग की 400 मीटर दौड़ का खिताब जीता जबकि पीटी उषा ने 100 और 200 मीटर के रजत पदक जीतकर अपनी जीवंत उपस्थिति दर्ज कराई थी।

घुड़सवारी को इन खेलों में पहली बार शामिल किया गया था और भारत इसमें अपना दबदबा बनाए रखने में सफल रहा। उसने घुड़सवारी में तीन स्वर्ण जीते जिनमें इवेंटिंग के व्यक्तिगत मुकाबले के तीनों पदक भी शामिल हैं। इस स्पर्धा में रघुबीर सिंह, गुलाम मोहम्मद खान और प्रहलाद सिंह क्रमश: पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।
इन तीनों के शानदार प्रदर्शन से भारत टीम स्पर्धा का स्वर्ण पदक भी जीतने में सफल रहा जबकि टेंट पेगिंग में रूपिंदर सिंह बरार ने सोने का तमगा हासिल किया था।

गोल्फ भी पहली बार दिल्ली में ही एशियाई खेलों का हिस्सा बना था। भारत के लक्ष्मण सिंह ने व्यक्तिगत मुकाबले का स्वर्ण जीता और फिर देश को टीम स्पर्धा का स्वर्ण दिलाने में भी अहम भूमिका निभई। मुक्केबाजी में कौर सिंह और कुश्ती में सतपाल ने पीले तमगे जीते थे।
पाल नौकायन में जारिर करांजिया की टीम स्वर्ण पदक जीतने में सफल रही थी। उनकी टीम के सदस्य फारूख तारापोर अब ग्वांग्झू एशियाई खेलों में भी भाग लेंगे। (भाषा)


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