माँ नर्मदा का ऐतिहासिक कुंभ

नर्मदा की साधना सिद्घि दिलाती है

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नर्मदा किनारे स्थित पवित्र मंडला नगरी में माँ नर्मदा सामाजिक कुंभ के ऐतिहासिक आयोजन धर्माचार्य, संत, महंत एवं सामाजिक नेताओं एवं लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में चल रहा है।


इस अवसर पर आचार्य गोविंद देवगिरि हरिद्वार ने कविता के माध्यम से संदेश दिया कि नहीं बटेंगे, नहीं गिरेंगे, विश्वास दिलाने आए हैं हम। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक क्षण है। माँ नर्मदा की जयंती है, हम जन्म दिवस पर कुछ उपहार देते हैं। राष्ट्र की मूल आधारशिला धर्म है, धर्म देश का संजीवनी सूत्र है यह विवेकानंद स्वामी कहते थे। कुंभ माँ नर्मदा में होने से शक्ति जगेगी। इस शक्ति से भारत महान बनेगा।

गुरु शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानंदजी महाराज ने कहा कि नर्मदा पर की गई साधना सिद्घि दिलाती है। हमें यहाँ पर कुछ त्याग कर जाना चाहिए। उन्होंने व्यसन मुक्त समाज एवं राष्ट्र बनाने का आह्वान किया।

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेशवासियों के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा का आधा खर्च सरकार उठाएगी। साथ ही नर्मदा जयंती पर हर वर्ष मंडला में कार्यक्रम का आयोजन होगा। उन्होंने नदी के चारों ओर नर्मदा परिक्रमा पथ व पौधरोपण करने, विंध्याचल, हिमाचल के दोनों ओर के पर्वतों को हरा-भरा बनाने की घोषणा की।

आरएसएस के सरसंघ संचालक मोहन भागवत ने कहा कि हम जो काम कर रहे हैं, वह पवित्र काम है, इसमें संकोच नहीं होना चाहिए। हमें संस्कार के साथ विकास चाहिए। भारत वर्ष के सनातन विचारों से यह संभव है। हमें अपने धर्म के प्रति क्रियाशील होना पड़ेगा और इसके लिए संकल्प लेना होगा, तभी सामाजिक एकता और समरसता का विकास होगा।
ज्योतिष एवं द्वारिकापीठ के द्विपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि मंडला में चल रहे माँ नर्मदा सामाजिक कुंभ को कुंभ जैसी संज्ञा देना अनुचित है। पुराणों में देश के सिर्फ चार स्थानों प्रयाग, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में ही कुंभ के आयोजन का उल्लेख है। इसमें व्यक्ति बिना आमंत्रण के जाता है। शंकाराचार्य ने कहा कि इसीलिए मंडला जैसे कार्यक्रम को कुंभ कहना अनुचित है। अच्छा होता कि इसे सामाजिक सम्मेलन नाम दिया जाता।



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