महालक्ष्मीजी की बिदाई आज

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परिवारों के लिए शुक्रवार का दिन बहुत ही विशेष था। घरों में सुबह से रंगोली बनाने और सजावट करने का सिलसिला प्रारंभ हो गया था। मान्यतानुसार घर में बेटी स्वरूप आई ज्येष्ठा गौरी व कनिष्ठा गौरी को श्रृंगारित कर नैवेद्य अर्पित किया गया।


भादौ की अष्टमी तिथि को 16 तरह की सब्जियों और विभिन्न प्रकार के मिष्ठान्नों के साथ महालक्ष्मीजी को नैवेद्य भेंट किया गया तथा उनकी आराधना की गई। पूजन में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने भाग लिया। महापर्व के दूसरे दिन के सभी सदस्यों ने गौरी का पूजन कर धन, वैभव, सुख, समृद्धि और शांति की कामना की।

इस आयोजन के पीछे यह मान्यता है कि महालक्ष्मी तीन दिनों के लिए अपने मायके आती हैं और उन्हीं की अगवानी में यह पूजा आयोजित की जाती है। अष्टमी की शाम महिलाओं ने सुहागिनों को हल्दी-कुमकुम भी किया। मराठीभाषी परिवारों में इस दिन विशेष उत्साह नजर आया और भक्तों ने एक-दूसरे के घर जाकर महालक्ष्मी के दर्शन किए।

इस महापर्व के तीसरे व अंतिम दिन शनिवार को देवी की बिदाई के साथ ही अगले वर्ष जल्दी आगमन की कामना भी की जाएगी। नवमी को विधि-विधान के साथ गौरी विसर्जन किया जाएगा।



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