स्लमडॉग 'ऑस्कर' की तैयारी में

स्लमडॉग मिलियनेयर
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वैसे तो न्यूयॉर्क शहर में कुछ कदम चलने पर ही एक भारतीय रेस्तराँ मिल जाएगा, जहाँ काले और गोरे अमेरिकी लंच और डिनर के लिए कतार में खड़े रहना भी बुरा नहीं मानते हैं। भारतीय मसालों, मिठाई और ग्रोसरी की दुकानें भी कम नहीं हैं।

नए हर तरफ नजर आते हैं। कुछ इलाकों को मिनी इंडिया कहा जाता है, लेकिन आम अमेरिकी को आज भी भारतीय कला-संस्कृति के नाम पर सिर्फ घटिया साड़ी-सलवार, कुर्ते की दुकानों और जाली म्यूजिक के खोखों से ही संतोष करना पड़ता है।

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'स्लमडॉग मिलियनेयर' ने आम अमेरिकी दर्शकों के बीच हलचल मचा दी है। अँगरेजी और हिन्दी में बनी यह फिल्म 12 नवंबर को गिने-चुने आर्ट फिल्म हॉलों में 'इंडी फिल्म' की तरह दिखाई गई। 26 दिसंबर को फिल्म पूरे अमेरिका में रिलीज कर दी गई। फिल्म की लोकप्रियता तेज आँधी की तरह फैली। जैसे अखबारों ने 'स्लमडॉग मिलियनेयर' की तारीफों में लेख लिखे।

स्लमडॉग मिलियनेयर
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फिल्म आम दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन गई। मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं कि मैंने भी अपने अमेरिकी मित्र के कहने पर यह फिल्म देखी। सिनेमाघर में अमेरिकी दर्शकों को देखकर मुझे हैरानी हुई। उनका फिल्म के साथ इंटरएक्शन उल्लेखनीय है। 11 जनवरी को 'स्लमडॉग मिलियनेयर' को चार मिले। संगीतकार यह पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय बने।

सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक व्यभिचारों से उत्पन्ना कुंठाओं पर 'स्लमडॉग' एक पैनी और तीखी टिप्पणी है। इस फिल्म को बॉलीवुड को हॉलीवुड का 'मसाला सलाम' कह सकते हैं। यह भी संभव है कि यह को हो। मैं इसे भारतीय सिनेमा के मसाला फिल्मकारों को चुस्त, सामायिक और मनोरंजक फिल्म बनाने वालों की चेतावनी मानता हूँ।

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- संदीप राय चौधरी (न्यूयॉर्क)
बहरहाल अपनी कथा, शिल्प और उत्कृष्ट फिल्मकला की प्रस्तुति के लिए 'स्लमडॉग मिलियनेयर' का ऑस्कर अवॉर्ड के लिए चुना जाना कोई अनहोनी नहीं होगी। पटकथा, निर्देशन, संगीत और सर्वश्रेष्ठ फिल्म के 'गोल्डन ग्लोब' अवॉर्ड लेकर यह फिल्म अब अकादमी के ऑस्कर अवॉर्ड की तैयारी में है।



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