मां विंध्यवासिनी जयंती: श्रीकृष्ण की बहन कौन हैं? जानें देवी से जुड़ी 5 खास बातें
हिन्दू पूर्णिमान्त पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को विन्ध्यवासिनी जयंती के रूप में मनाया जाता है जबकि अमान्त पंचांग के अनुसार यह तिथि श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में आती है। मां विंध्यवासिनी की पूजा केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भक्तों की सोई हुई किस्मत जगाने वाली और तुरंत फल देने वाली महासाधना है। चलिए जानते हैं पूजा का शुभ मुहूर्त और माता के बारे में 5 खास बातें।
विन्ध्यवासिनी पूजा का शुभ मुहूर्त:-
ब्रह्म मुहूर्त: प्रात: 04:52 से 05:38 तक।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:12 से 13:02 तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:51 से 07:14 तक।
निशिथ काल मुहूर्त: 00:14 से 01:01, सितम्बर 05
1. कान्हा की रक्षक 'योगमाया':
द्वापर युग की बात है, जब वासुदेव श्रीकृष्ण ने जन्म लिया, ठीक उसी समय भगवान विष्णु के आदेश से 'योगमाया' ने माता यशोदा के आंगन में जन्म लिया। बालकृष्ण को कंस के प्रकोप से बचाने के लिए वासुदेव जी ने चुपके से दोनों नवजात शिशुओं की अदला-बदली कर दी थी।
2. कंस को ललकार:
कारागार की सलाखों के पीछे जब अत्याचारी कंस ने उस नन्हीं कन्या को पत्थर पर पटकना चाहा, तो वह दिव्य कन्या उसके हाथों से फिसलकर सीधे आकाश में ओझल हो गई। फिर गूंजी एक कड़कती हुई चेतावनी—"तुम्हारा काल जन्म ले चुका है!"
3. रूप अनेक, महिमा एक:
श्रीकृष्ण की बहन होने के कारण इन्हें 'कृष्णानुजा' पुकारा गया, तो श्रीमद्भागवत में इन्हें 'नंदजा' और 'एकानंशा' के नाम से पूजा गया। यही वह अदृश्य शक्ति थीं, जिन्होंने श्रीकृष्ण की ढाल बनकर कंस और उसकी दानवी सेना का अंत करवाया।
4. विंध्याचल पर निवास:
शिवपुराण में उल्लेख मिलता है कि ये देवी माता सती का ही अंश हैं, जिन्हें 'वनदुर्गा' भी कहा जाता है। देवताओं की प्रार्थना पर संपूर्ण संसार के कल्याण के लिए मां ने विंध्याचल पर्वत को अपना शाश्वत धाम चुना।
5. साधना का महत्व और पूजन विधि
शीघ्र फलदायी कुलदेवी: मां विंध्यवासिनी नागवंशीय राजाओं की पूज्य कुलदेवी हैं। माना जाता है कि इनकी उपासना करने से साधक को बहुत जल्दी सिद्धि और मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
विशेष पूजन अनुष्ठान: माता के दरबार में दूध, जल और शहद से अभिषेक करने का बड़ा महात्म्य है। कुमकुम अर्चन और अखंड ज्योति जलाकर ध्यान लगाने से घर-परिवार पर देवी की अनुकंपा बनी रहती है।
मनोकामना पूर्ति महामंत्र: जीवन में सुख, समृद्धि और मनवांछित फल पाने के लिए इन दिव्य मंत्रों का जाप अत्यंत फलदायी माना गया है:
"ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडाय विच्चै"
"ॐ ह्रीं महालक्ष्म्यै नमः"
विन्ध्येचैवनग-श्रेष्ठे तवस्थानंहि शाश्वतम्।

