जीवन के प्रति बहुत कम लोग सतर्क: डॉ. अग्रवाल

भोपाल (वार्ता) | वार्ता| पुनः संशोधित मंगलवार, 1 सितम्बर 2009 (11:53 IST)
प्रबंधन पर कई लोकप्रिय पुस्तकें लिखने वाले डॉ. विजय अग्रवाल का मानना है कि व्यक्ति असफलता और सफलता के खाँचे में बाँट कर ही जीवन को देखता है, जबकि जीवन के प्रति समझदारी को लेकर बहुत कम लोग सतर्क और जागृत होते हैं।

अतिरिक्त महानिदेशक पत्र सूचना कार्यालय (मप्र-छत्तीसगढ-राजस्थान) के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के तहत कार्यभार से मुक्त होने वाले डॉ. अग्रवाल ने चर्चा में कहा कि जीवन में सही मायनों में सफलता का स्वाद वही चखते हैं जो जीवन के प्रति समझदारी रखते हैं।

उन्होंने कहा कि जीवन के प्रति समझदारी का आशय इस बात से है कि हम किसी राकेट की तरह अलग-अलग चरणों में निरर्थक हो चली चीजों को पीछे छोड़ते हुए और गति से ऊपर की तरफ बढ़ते चलें।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि सफलता हमेशा अपने साथ दबाव और चुनौतियाँ लाती है। इन चुनौतियों और दबावों की वजह से कई लोग सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ने से भी डरते हैं। जो लोग यह सीढियां चढ कर ऊपर आते है उनमें से कई सफलता के दबाव के आगे घुटने टेक देते हैं।



और भी पढ़ें :