कैग करेगा पीपीपी खातों का अंकेक्षण

नई दिल्ली| भाषा| पुनः संशोधित मंगलवार, 16 नवंबर 2010 (17:07 IST)
FILE
प्रधानमंत्री ने मंगलवार को संकेत दिया कि सरकारी अंकेक्षक. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को सार्वजनिक-निजी साझीदारी (पीपीपी) वाली परियोजनाओं के खातों का करने की अनुमति दी जा सकती है।

सिंह ने ढाँचागत परियोजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित किए जाने पर बल देते हुए कहा कि यह सुनिश्चित करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा कि इस पहल से ऐच्छिक परिणाम हासिल किए जा सकें।

कैग की 150वीं वषर्गांठ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और लोकहितों का संरक्षण सुनिश्चित हो, इसके लिए निजी-सार्वजनिक साझीदारी व्यवस्था के ढाँचे में सुधार की जरूरत है।
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक विनोद राय ने पीपीपी परियोजनाओं के खातों का अंकेक्षण करने की अनुमति माँगी है क्योंकि इन परियोजनाओं में बड़ी मात्रा में सार्वजनिक धन खर्च किया जा रहा है।

अभी कैग की भूमिका सरकारी संस्थानों एवं सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के खातों के अंकेक्षण तक ही सीमित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि केन्द्र और कई राज्य सरकारों ने ढांचागत परियोजनाओं में उल्लेखनीय निवेश के लिए पीपीपी मॉडल को सफलतापूर्वक लागू किया है।
आर्थिक सुधार की शुरुआत के बाद इस प्रमुख क्षेत्र में सरकार की भूमिका घटने के उपरांत ढाँचागत क्षेत्र अपने विकास में संसाधन की कमी की समस्या से जूझ रहा है। (भाषा)



और भी पढ़ें :