जैव प्रौद्योगिकी बाजार पाँच अरब डॉलर का होगा

नई दिल्ली (वार्ता) | वार्ता| पुनः संशोधित रविवार, 3 जून 2007 (00:48 IST)
देश के जैव प्रौद्योगिकी उद्योग के वर्ष 2009-10 तक वर्ष 2005-06 के 1.5 अरब डॉलर से तीन गुना से अधिक बढ़कर पाँच अरब ॉलर का हो जाने की उम्मीद है।


उद्योग एवं वाणिज्य संगठन 'एसोचैम' की ओर से 'जैव प्रौद्योगिकी का भविष्य' विषय पर जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक 2005-06 में कृषि जैव प्रौदयोगिकी एवं जैव सेवा क्षेत्र में 36 करोड़ डॉलर का निवेश हुआ था।

देश में जैव प्रौदयोगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में इस समय 300 से अधिक कंपनियाँ सक्रिय हैं। हालाँकि इस क्षेत्र का लगभग आधा राजस्व 10 बड़ी कंपनियों में सिमटा हुआ है।

जैव प्रौदयोगिकी क्षेत्र में जैव औषधि क्षेत्र का बाजार 2005-06 के दौरान 32 फीसदी बढ़कर एक अरब डॉलर का हो गया। इस क्षेत्र में सबसे अधिक कंपनियाँ सक्रिय हैं।


एसोचैम के अध्यक्ष वीएन धूत का कहना है कि 2005-06 के दौरान जैव औषधि क्षेत्र में 76.3 करोड़ डॉलर का निर्यात हुआ। पूरे जैव प्रौदयोगिकी क्षेत्र का 52 फीसदी राजस्व इसी क्षेत्र से आता है। जैव प्रौदयोगिकी क्षेत्र के कुल निर्यात का 75 फीसदी और घरेलू बिक्री का 70 प्रतिशत जैव औषधि क्षेत्र में ही हुआ।
धूत ने कहा कि जैव प्रौदयोगिकी क्षेत्र में 70 करोड़ डॉलर का निवेश हो सकता है। अगले तीन चार वर्षों के दौरान इस क्षेत्र में कई संयुक्त उपक्रम लगाए जाने की उम्मीद है। यह ज्ञान आधारित उद्योगों में ही नहीं बल्कि कृषि एवं बागवानी जैसे क्षेत्रों में भी होगा।

इस क्षेत्र में विश्व बैंक इंटरनेशनल फाइनेंस कारपोरेशन जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं और निजी इक्विटी फर्मों एवं बैंकों को ऋण देने के लिये प्रोत्साहित करने की क्षमता है।



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