कृषि आपूर्ति में बड़े उद्योगों को प्रोत्साहित करें- प्रणब

नई दिल्ली| भाषा| पुनः संशोधित बुधवार, 15 फ़रवरी 2012 (18:21 IST)
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वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने महंगाई से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राज्यों से बड़े उद्योगों और कंपनियों को कृषि उपजों के भंडारण, परिवहन और बेहतर रखरखाव से जुड़ी आपूर्ति श्रंखला में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया है।


मुखर्जी ने कहा कि बहुब्रांड खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति का निर्णय लंबित रहने के बावजूद राज्य आपूर्ति श्रंखला का आधारभूत ढांचा खड़ा करने के लिए संगठित क्षेत्र को प्रोत्साहित करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि खाद्य और रोजमर्रा के इस्तेमाल की दूसरी वस्तुओं जिनकी वजह से हाल में खाद्य मुद्रास्फीति में तीव्र वृद्धि दर्ज की गई थी, उनकी आपूर्ति बेहतर बनाने में नीतिगत लिहाज से संगठित क्षेत्र के उतरने में कोई अड़चन नहीं है।

वित्त मंत्री ने कहा कि यहां तक कि यदि हम बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में आम सहमति कायम भी कर लेते हैं तब भी राज्यों के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि वह खाद्य पदार्थों की आपूर्ति श्रंखला में संगठित क्षेत्र की मौजूदगी को प्रोत्साहित करे। संगठित क्षेत्र के लिए इस बात की काफी संभावनाएं हैं कि वह भी खुदरा कारोबार में उतरे पारिवारिक घरानों के साथ क्षेत्र में उतर सकते हैं।

मुखर्जी आज यहां कृषि क्षेत्र पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की पहल पर किया गया। कार्यशाला में 20 राज्यों के राज्यपाल, आठ केन्द्रिय मंत्री और पांच राज्यों के मुख्यमंत्री उपस्थित हुए।

वित्त मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए सतत् वृद्धि के साथ साथ अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की भी आवश्यकता है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2010 और 2011 के दौरान अर्थव्यवस्था के लिए ऊंची मुद्रास्फीति बड़ी परेशानी बनी रही। इस दौरान ज्यादातर समय खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने से खाद्य मुद्रास्फीति लगातार दहाई अंक में बनी रही।

कार्यशाला के लिए तैयार पृष्टभूमि दस्तावेज में कहा गया है कि कृषि उपज स्थल और उपभोक्ता मूल्यों के बीच भारी अंतर की समस्या को दूर करने के मामले में बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लाना एक रास्ता हो सकता है। वित्त मंत्री ने कहा खाद्य सुरक्षा कानून के क्रियान्वयन को देखते हुये खाद्यान्नों का उत्पादन और वसूली दोनों ही बढ़ाने होंगे। (भाषा)



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