बाल कविता : चुहिया रानी

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चुहिया रानी, चुहिया रानी
लगती हो तुम बड़ी सयानी।

जैसे हो इस घर की रानी,

कभी तो करती हो मनमानी।

कुतुर-कुतुर सब खा जाती,

आवाज सुन झट से छिप जाती।

जब भी घर में बिल्‍ली आती,
दूम दबा बिल में चली जाती।



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