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Written By भाषा
पुनः संशोधित सोमवार, 17 मई 2010 (14:29 IST)

झूठ बोलने वाले बच्चे होते हैं कामयाब

भले ही आपको अटपता लगे लेकिन जो नन्ही उम्र में झूठ बोलते हैं, वे बड़े हो कर सफलता की बुलंदी चूमते हैं। जी हाँ, बच्चों को बचपन से ही सच्चाई एवं ईमानदारी का भाव भरने की सामान्य धारणा के विपरीत एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि जो बच्चे झूठ बोलते हैं, वे बड़े होकर सफल नागरिक बनते हैं।

शोधकर्ताओं ने पाया है कि बचपन में झूठ बोलने वाले बच्चे बाद के जीवन में काफी सफल होते हैं। वास्तव में दो वर्ष की आयु में झूठ बोलने की क्षमता, बच्चे के मस्तिष्क के तेजी से विकास करने का संकेत होता है और उसके सफल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

अध्ययन में पाया गया है कि बच्चा जितने अच्छे तरीके से झूठ बोल रहा होगा, बाद के वर्षों में उसमें उतनी तेजी से अक्ल आएगी और उसमें अच्छी तरह से सोचने-समझने की क्षमता का विकास होगा।

इसका अर्थ यह हुआ कि बच्चे में कार्यकारी क्षमता का विकास हो गया है, जिससे वह सच को अपने दिमाग में कहीं छिपाकर, प्रभावी ढंग से झूठ बोलने के तरीके ईजाद करता है।

उन्होंने कहा कि उनके जवाब में उनके खिलाफ लगाए सभी ‘झूठे आरोपों’ के जवाब दिए गए हैं।
टोरंटो विश्वविद्यालय के शोधकर्ता कांग ली के हवाले से ब्रिटेन के मीडिया ने कहा है कि अगर बच्चा झूठ बोलता है तो अभिभावकों को इससे चिंतित नहीं होना चाहिए।

आमतौर पर सभी बच्चे झूठ बोलते हैं। कांग ली यह भी कहते हैं कि जो बच्चे प्रभावी तरीके से झूठ बोलते हैं, बाद के जीवन में वे बेहतर करते हैं।

शोधकर्ताओं ने कहा कि झूठ बोलने में मस्तिष्क का विविधतापूर्ण उपयोग होता है, जिसमें सूचना के स्रोत के समन्वय और अपने फायदे के लिए तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने की प्रक्रिया शामिल होती है, जो मस्तिष्क के विकास से जुड़ा हुआ होता है। इससे उच्च क्षमता की सोच और तर्क की शक्ति का विकास होता है। (भाषा)