तरुण सागर जी के कड़वे प्रवचन

क्रांतिकारी राष्ट्रसंत मुनिश्री तरूणसागरजी के कड़वे प्रवचन

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* परिवार के किसी सदस्य को तुम नहीं बदल सकते। तुम अपने आपको बदल सकते हो, यह तुम्हारा जन्मसिद्घ अधिकार भी है। पूरी दुनिया को चमड़े से ढंकना तुम्हारे बस की बात नहीं है। अपने पैरों में जूते पहन लो और निकल पड़ों फिर पूरी दुनिया तुम्हारे लिए चमड़े से ढंकी जैसी ही होगी। मंदिर और सत्संग से घर आओ, तो तुम्हारी पत्नी को लगना चाहिए कि बदले-बदले मेरे सरकार नजर आते हैं।

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