प्रयाग कुम्भ मेला 2013 : इलाहाबाद के प्राचीन स्थल

प्रयाग कुम्भ मेला 2013
WD|
FILE
तीर्थों में प्रमुख प्रयागराज का महत्व ऋग्वेद के काल से ही बना हुआ है। पवित्र गंगा और यमुना नदी के संगम तट पर बसे इस शहर की महिमा का वर्णन महाभारत, अग्निपुराण, पद्मपुराण और सूर्यपुराण में मिलता है। पौराणिक मान्यता है कि प्रयाग में साढ़े तीन करोड़ तीर्थस्थल हैं। इसमें स्वर्ग, पृथ्वी और पाताललोक के एक-एक करोड़ और वातावरण के पचास लाख तीर्थस्थल शामिल हैं। यहां पर दुनिया के सभी ऋषि-मुनि, बुद्ध, तीर्थंकर, पैगंबर और अवतारियों के चरण पड़े हैं।

आओ जानते हैं यहां के कुछ खास प्रमुख धार्मिक स्थलों के बारे में।

अक्षय वट : हिंदू धर्म के प्रमुख चार बरगद के वृक्षों में से एक अक्षय वट प्रयाग के पातालपुरी में स्थित है। प्रयाग (इलाहाबाद) में अक्षयवट, मथुरा-वृंदावन में वंशीवट, गया में गयावट जिसे बौद्धवट भी कहा जाता है और उज्जैन में पवित्र सिद्धवट है।
पातालपुरी मंदिर के भीतर स्थित इस अक्षय वट को अमर वृक्ष भी कहते हैं। इसी के पास एक अशोक वृक्ष भी है। इस वृक्ष का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में मिलता है।

भारद्वाज ऋषि का आश्रम : ऋषि भारद्वाज जिन्होंने विमानशास्त्र लिखा था, उन्होंने यहीं पर एक शिवलिंग की स्थापना की थी जिसे भार्द्वाजेश्वर महादेव कहा जाता है। भगवान राम के काल में हुए ऋषि भारद्वाज के गुरु वाल्मीकि थे। उनके इस आश्रम में कई प्राचीन मूर्तियां रखी हुई है। माना जाता है कि पहले यहां एक विशाल मंदिर था और पहाड़ के ऊपर एक भरतकुंड था।
FILE
लाक्षागृह : लाख से बना हुआ घर जिसे लाक्षागृह कहते हैं। माना जाता है कि इसे धृतराष्ट्र के पुत्र दुर्योधन ने पांडवों को जाल में फांस कर मारने के लिए बनाया था लेकिन विदुर की चतुराई के चलते पांडव गुप्त द्वार से भाग निकले थे। यह महल गंगा नदी के तट पर हंडिया के 6 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है।
ललिता देवी मंदिर : 108 फीट ऊंचे इस मंदिर की गणना 52 शक्तिपीठों में की जाती है। ललिता देवी मंदिर परिसर में पीपल का एक प्राचीन वृक्ष भी है और वहां कई मूर्तियां हैं। यह मंदिर मीरपुर इलाके में स्थित है।

हाटकेश्वर मंदिर : भगवान हाटकेश्वर का यह प्राचीन मंदिर इलाहाबाद में शून्य सड़क पर स्थित है। शिव के इस मंदिर में और भी कई मूर्तियां विराजमान है।
समुद्र कूप : गंगा नदी के तट पर स्थित ऊंचे टीले पर एक कुंआ बना है। इस कुंए को राजा समुद्रगुप्त ने बनवाया था, इसीलिए इसका नाम समुद्र कूप है। बड़े-बड़े पत्थरों से बने इस कुंए का व्यास 15 फीट है और गहराई में यह अनंत है। इसका जल स्तर नीचे समुद्र स्तर के बराबर है। यह बड़े पत्थर से बनाया गया है।

शंकर विमान मंडपम् : कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य चंद्रशेखरेन्द्र सरस्वती की पहल पर 1986 में ‍भव्य शंकर विमान मंडपम् के निर्माण की आधारशीला रखी गई। निर्माण कार्य 16 साल में पूरा हुआ। तीन मंजिला यह मंदिर संगम के तट पर स्थित है।
इसके अलावा प्रयाग में सरस्वती कूप, दुर्वासा आश्रम, ताक्षकेश्वर नाथ, नाग वासुकी मंदिर, कल्याणी देवी, शिवकुटी, कमौरी नाथ महादेव, राधा माधव मंदिर, बारी काली, सांई धाम मंदिर, बोलन शंकर मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर, हनुमान मंदिर आदि सैंकड़ों मंदिर है।

ऐतिहासिक स्थलों में अशोक स्तंभ, इलाहाबाद का किला, जहांगीर का शिलालेख, मिंटो पार्क, स्वराज भवन, आनंद भवन, जवाहर तारामंडल, पत्थर गिरजाघर, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद संग्रहालय, खुसरो बाग, मायो मेमोरियल हॉल आदि।



और भी पढ़ें :