अद्भुत पर्यटक स्थल सराहन घाटी

पर्यटकों की राह देखता सराहन का सौंदर्य

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की राजधानी शिमला और जिले की सीमा पर बसा स्वर्ग का एहसास कराने वाला एक सुंदर और अद्भुत है जो सराहन घाटी के नाम से भी जाना जाता है। यह क्षेत्र कई वर्षों तक के लिहाज से बचा रहा मगर अब पिछले कुछ वर्षों से इस तरफ पर्यटकों की भीड़ बढ़ने लगी है।

इसलिए अब सरकार ने भी इसे पर्यटन के लिए लिहाज से उपयुक्त समझा है। यह शहर समुद्रतल से 7,589 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। इतिहास में इसको बुशहर नाम से भी जाना जाता है। इसके अतिरिक्त 51 शक्तिपीठों में से एक भीमाकाली माता का मंदिर भी इसी शहर में है। हिंदू और बौद्ध वास्तुशिल्प से निर्मित यह मंदिर लगभग 2,000 वर्ष पुराना है, मगर इसका जीर्णोद्धार कर इसको पुनः वही आकार दिया गया है।
पत्थरों और लकड़ी के इस्तेमाल से बना यह मंदिर शत-प्रतिशत भूकंपरोधी है। मंदिर के प्रांगण में खड़े होकर आप हिमालय को साक्षात निहार सकते हैं। इस मंदिर के नजदीक ही आपको एक पक्षी-विहार है जिसमें यहां के राज्य-पक्षी मोनाल सहित लगभग हर प्रकार के पहाड़ी पक्षी हैं। सरकार और स्थानीय लोगों के प्रयासों से रास्तों के दोनों तरफ लगाए गए तरह-तरह के फूल लहराते हुए पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
सराहन से लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर यदि घाटी से थोड़ा नीचे उतरेंगे तो वहां आपको सतलज नदी का मनोहारी दृश्य मिलेगा। इसके अतिरिक्त सराहन से कुछ ही दूरी पर कामरू का ऐतिहासिक किला, चितकुल घाटी और बस्पा नदी जैसे अन्य पर्यटन स्थल भी हैं जहां आप आसानी आ-जा सकते हैं।

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शहर अत्यधिक बड़ा न होने के कारण यहां यातायात के साधनों की आवश्यकता कम ही होती है इसलिए कुछ स्थानों पर पैदल भी घूमा जा सकता है। फिर भी यहां टैक्सी, बस आदि की सुविधा आसानी से मिल जाती है और महंगी भी नहीं है। पर्यटकों की सुविधा के लिए सरकार ने यहां आम से खास तक, सभी के बजट के अनुसार आदि का भी विशेष प्रबंध किया है।
यहां आने के लिए सर्दियां उचित समय नहीं है क्योंकि इस मौसम में यहां पर तापमान शून्य से भी नीचे ही रहता है। यहां आने के लिए मार्च से जून और सितंबर से अक्टूबर का समय बहुत ही अच्छा समय है। दिन के समय यहां का तापमान लगभग 30 से 32 डिग्री तक रहता है। मगर रात को ठंड बढ़ जाती है।

यदि अपनी गाड़ी से जा रहे हैं तो ध्यान दें कि शिमला से राष्ट्रीय राजमार्ग 22 से होते हुए रास्ते में थेयोग, नारकंडा, रामपुर और जैओरी नामक कुछ छोटे-छोटे पर्यटन स्थल भी आते हैं जहां आपको पेट्रोल पंप की सुविधा मिलेगी। शिमला से सराहन के बीच लगभग 180 किलोमीटर के इस रास्ते पर जब आप निकलेंगे तो आपका सामना देवदार के घने जंगलों, कई सारे छोटे-बड़े झरनों, खेतों एवं छोटे-छोटे अनेक गांवों से होगा।
इन गांवों से होकर जाने पर आपको उनके पारंपरिक पहनावे और संस्कृति की भी झलक देखने को मिलेगी। सराहन जाने के लिए सड़क मार्ग ही है जो शिमला से टैक्सी, जीप या बस द्वारा भी जाया जा सकता है। यह दूरी लगभग 6-7 घंटे में आसानी से तय की जा सकती है।

यह रास्ता अधिकतर सतलुज नदी के किनारे से गुजरता है, इसलिए इसकी तेज धारा आपको एक नए संगीत की से रू-ब-रू कराएगी। इसके अतिरिक्त जैसे-जैसे आप सराहन के नजदीक पहुंचेगे वैसे-वैसे आपको मार्ग के किनारे अनेक प्रकार की जड़ी-बूटियां भी नजर आने लगेंगी।


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