दरवाजा

फाल्गुनी

स्मृति आदित्य|
ND
यह कैसा रिश्ता है
हम दोनों के बीच कि

जब तुम
दरवाजे से बाहर निकलते हो
तब मैं

अपने दरवाजे बंद कर लेती हूँ
और जब

तुम्हारे दरवाजे बंद होते हैं
तब अपना दरवाजा खोलकर इंतजार करती हूँ मैं
कि कब
तुम्हारा दरवाजा खुलें
और तुम बाहर निकलो,
देखा है मैंने छुपकर कि
जब मेरे दरवाजे बंद होते हैं
तब तुम भी प्रतीक्षित आँखों से
देखते हो उनकी तरफ,
कब तक चलेगा यह खेल हम दोनों
एक साथ दरवाजा
क्यों नहीं खोलते?



और भी पढ़ें :