जब बढ़ानी हो आहार की पौष्टिकता

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पौष्टिकता इससे बढ़ेगी

*अनाज को अंकुरित करने से उनमें निहित प्रोटीन टूटकर कहीं ज्यादा पाचक रूपों में चोकरित हो जाता है। इससे दालों में विटामिन 'सी' की मात्रा 60 से 90 प्रतिशत तक तथा विटामिन 'बी' की मात्रा 15 से 40 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।

*खाद्य पदार्थों को खमीरित करने से भी उनमें 'बी-कॉम्प्लेक्स' विटामिनों की मात्रा बढ़ जाती है।

पहले से तैयारी करें

*पकाने या खाने के समय से बहुत पहले से सब्जियों या फलों को काटकर न रख दें। कटी हुई सब्जियाँ जितनी ज्यादा देर हवा के संपर्क में रहेंगी उनमें से विटामिन 'सी' और 'बी' की हानि उतनी ही ज्यादा होगी।

*फलों और सब्जियों को काटने से पहले धोएँ। उन्हें काटने के बाद धोने से उनमें निहित जल में घुलनशील विटामिन ('सी' तथा 'बी कॉम्प्लेक्स' समूह) पानी के साथ बह जाएँगे।

*सब्जियों को यथासंभव छोटे के बजाए बड़े-बड़े टुकड़ों में काटें। जितनी ज्यादा कटी हुई सतह हवा के संपर्क में आएगी, विटामिनों की हानि उतनी ही ज्यादा होगी।
  *पकाने या खाने के समय से बहुत पहले से सब्जियों या फलों को काटकर न रख दें। कटी हुई सब्जियाँ जितनी ज्यादा देर हवा के संपर्क में रहेंगी उनमें से विटामिन 'सी' और 'बी' की हानि उतनी ही ज्यादा होगी...      

*चावल को बहुत ज्यादा पानी में या बार-बार धोने से बी विटामिनों की हानि 40 प्रतिशत तक भी हो सकती है। यदि धोना ही हो तो चावल को पानी की न्यूनतम मात्रा में धोएँ।

सही ढंग से पकाएँ

*सब्जियों को उबालने के बाद यदि आप उस पानी को फेंक देते हैं तो आप उस पानी के साथ जल में घुलनशील विटामिन और उन खनिजों से भी हाथ धो बैठते हैं, जो सभी-के-सभी पकाए गए पानी में घुल चुके हैं।

*जल में घुलनशील विटामिनों की हानि को कम करने के लिए भोजन को उबालने की बजाए भाप में पकाएँ।

*यदि पकाने के लिए उबालना जरूरी ही हो तो इसके लिए कम से कम पानी का इस्तेमाल करें पकने के बाद बचे हुए पानी का उपयोग सूप, ग्रेवी या अन्य चीजें बनाने में कर लें।

*पकाते समय बर्तन को ढँककर रखें ताकि भोजन पकेगा भी जल्दी और पोषक तत्व भी बचे रहेंगे।

*लोहे के पात्र में भोजन पकाने से उस भोजन में लौह तत्व शामिल हो जाता है। टमाटर जैसे अम्लीय खाद्यों जो बर्तन में से लोहा सोख लेते हैं, के मामले में ऐसा खासतौर से होता है।
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