चॉकलेट : सेहत के लिए भी स्वीट

7 जुलाई : चॉकलेट डे

भाषा|
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ॉकलेट का जिक्र हो और मुँह में पानी न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। बच्चों से लेकर बड़ों तक को चॉकलेट का शौक होता है। यही वजह है कि इसके नुकसान की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता।

चॉकलेट दो तरह की होती हैं। ब्लैक चॉकलेट और व्हॉइट चॉकलेट। दोनों को ही लोग पसंद करते हैं। आहार विशेषज्ञ डॉ.. सुनीत खन्ना कहते हैं, 'दोनों तरह की चॉकलेट में एंटीऑक्सिडैंट्स पाए जाते हैं लेकिन ब्लैक चॉकलेट रक्तचाप कम करने में फायदेमंद होती है। वहीं, चीनी की अधिकता होने के कारण व्हॉइट चॉकलेट से वजन बढ़ सकता है। व्हॉइट चॉकलेट में दूध और चीनी होती है इसलिए अगर इसे खाने वाले व्यक्ति की सेहत सामान्य है तो यह हानिकारक नहीं है। अगर स्वस्थ व्यक्ति रोजाना दोनों तरह की चॉकलेट का 15 ग्राम से भी कम मात्रा में सेवन करता है तो यह नुकसानदेह नहीं है।
अगर व्हॉइट चॉकलेट की लत पड़ जाए तो इससे वजन बढ़ सकता है और रक्त में चीनी की मात्रा बढ़ने से मधुमेह के मरीजों को यह नुकसान पहुँचा सकती है।

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आहार विशेषज्ञ कामिनी बाली के अनुसार, 'चॉकलेट खाने के बाद बच्चों को ब्रश जरूर करना चाहिए क्योंकि अगर दाँतों की दरारों में यह फँस जाए तो दाँत खराब होने की आशंका रहती है। लेकिन चॉकलेट के कुछ फायदे भी होते हैं। चॉकलेट में कोकोआ मिलाया जाता है। इसमें स्वास्थ्यवर्धक गुण होते हैं।
चॉकलेट कब अस्तित्व में आई यह तो कहना मुश्किल है लेकिन इतिहास के पन्ने बताते हैं कि 1100 ईसा पूर्व चॉकलेट जैसी लिक्विड वस्तु उपयोग में ली जाती थी। थोड़े कड़े रूप में चॉकलेट 1847 में बाजार में आई। इसके बाद मार्स इनकारपोरेट ने इसका सबसे पहले उत्पादन किया। प्रयोगों का सिलसिला चलता रहा। फिर अमेरिका में नेस्ले, कैडबरी से लेकर कई ब्रांड चॉकलेट निर्माता के तौर पर उभरे । हर साल को अमेरिका में चॉकलेट डे मनाया जाता है।
आजकल तरह-तरह के फ्लेवर वाली चॉकलेट बाजार में मौजूद हैं। इनमे ड्रायफ्रूट मिलाए जाते हैं। चॉकलेट का जादू छोटे से ले कर बड़ों तक को अपनी गिरफ्त मे ले लेता है। शायद यही वजह है कि सुपर स्टार अमिताभ बच्चन से लेकर रानी मुखर्जी तक चॉकलेट के विज्ञापनों में नजर आते हैं।


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