1. मनोरंजन
  2. बॉलीवुड
  3. आलेख
  4. yash-toxic-movie-flop-5-reasons-box-office-failure

यश की 'Toxic' का बॉक्स ऑफिस पर निकला दम, 3000 करोड़ का सपना चकनाचूर; जानें सुपर फ्लॉप होने के 5 बड़े कारण

यश की 'Toxic' का बॉक्स ऑफिस पर निकला दम, 3000 करोड़ का सपना चकनाचूर; जानें सुपर फ्लॉप होने के 5 बड़े कारण
भारतीय सिनेमा में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो रिलीज से पहले ही इतिहास रचने का दावा करती हैं। यश की 'टॉक्सिक' भी एक ऐसा ही तूफान थी, जिसके बारे में ट्रेड पंडितों ने भविष्यवाणी की थी कि यह बॉक्स ऑफिस पर 3000 करोड़ रुपये का जादुई आंकड़ा पार करेगी। 'KGF' के बाद यश का जो औरा बना था, उसे देखकर यह मुमकिन भी लग रहा था। लेकिन जैसे ही पर्दा उठा, उम्मीदों का यह महल ताश के पत्तों की तरह ढह गया। 'टॉक्सिक' बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह औंधे मुंह गिरी है। आखिर चूक कहां हुई? आइए, 5 प्रमुख बिंदुओं में करते हैं इस सिनेमैटिक डिजास्टर का पोस्टमार्टम।
 

1. ओवर कॉन्फिडेंस का शिकार हुए मेकर्स और यश

सफलता कभी-कभी आंखों पर पट्टी बांध देती है। 'टॉक्सिक' के साथ बिल्कुल यही हुआ। फिल्म को लेकर मेकर्स और खुद यश इस कदर ओवर कॉन्फिडेंट थे कि उन्होंने बॉक्स ऑफिस के सामान्य नियमों को ही ताक पर रख दिया। शुक्रवार की बजाय फिल्म को बुधवार को रिलीज करने का रिस्क लिया गया। रिलीज डेट के साथ कई बार जो खिलवाड़ हुआ, उसने दर्शकों के बीच बज (Buzz) को कम किया। ट्रेलर में बिना किसी संदर्भ के जमकर हिंसा और बोल्ड सीन्स परोसे गए, यह सोचकर कि सिर्फ सेंसेशन से दर्शक सिनेमाघरों तक खिंचे चले आएंगे, जो एक बड़ी भूल साबित हुई।
 

2. बेदम कहानी और एंटरटेनमेंट का टोटा

सिनेमा का बुनियादी उसूल है, 'कहानी ही किंग है।' लेकिन 'टॉक्सिक' में कहानी का अकाल पड़ा हुआ है। फर्स्ट हाफ में फिर भी थोड़ा बिल्ड-अप नजर आता है, लेकिन सेकंड हाफ आते-आते फिल्म पूरी तरह पटरी से उतर जाती है। यश के जिस 'डबल रोल' ट्रैक को फिल्म की जान बताया जा रहा था, वह जरा भी कन्विंसिंग नहीं है। दर्शकों को न तो किरदारों से कोई भावनात्मक लगाव हो पाता है और न ही कहानी में कोई ऐसी अपील है जो उन्हें सीट से बांधे रखे। मनोरंजन के नाम पर फिल्म पूरी तरह खाली है।
 

3. स्क्रीनप्ले में कंटीन्यूटी का घोर अभाव

एक अच्छी फिल्म की एडिटिंग और स्क्रीनप्ले उसे स्मूथ बनाते हैं, लेकिन 'टॉक्सिक' का स्क्रीनप्ले किसी भूलभुलैया से कम नहीं है। फिल्म में कन्फ्यूजन इतना ज्यादा है कि कई दृश्य दर्शकों के सिर के ऊपर से निकल जाते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि डायरेक्टर ने पहले कुछ हैवी-ड्यूटी एक्शन और ड्रामैटिक सीन्स शूट कर लिए और बाद में उन्हें किसी तरह जबरन कहानी में फिट करने की कोशिश की। दृश्यों के बीच कोई फ्लो नहीं है, जिससे दर्शक फिल्म की दुनिया से कट जाता है।
 

4. वन-मैन आर्मी बनने की जिद 

फिल्म का नाम भले ही 'टॉक्सिक' हो, लेकिन पर्दे पर सिर्फ 'यश' ही यश नजर आते हैं। फिल्म में जरूरत से ज्यादा यश को थोपा गया है। हर सीन में वे इतने डॉमिनेटिंग नजर आते हैं कि बाकी के बेहतरीन कलाकार बस बैकग्राउंड प्रॉप बनकर रह गए हैं। यश को मसीहा और लार्जर-देन-लाइफ दिखाने के चक्कर में कई सीन अनावश्यक रूप से लंबे और उबाऊ हो गए हैं। इस 'वन-मैन शो' की जिद ने फिल्म को बेहद बोरिंग बना दिया है।
 

5. बिना वजह हिंसा और बोल्डनेस का ओवर डोज

स्क्रीन पर खून-खराबा और मारधाड़ तभी असरदार लगती है, जब कहानी में उसका कोई ठोस आधार हो। 'टॉक्सिक' में ऐसा बिल्कुल नहीं है। बिना बात के मारधाड़, बेवजह कटते सिर और गोलियों की अनवरत बारिश एक समय के बाद सिरदर्द बन जाती है। फिल्म के कई एक्शन सीन्स एकदम मिसफिट लगते हैं। इसके अलावा, कहानी में जबरदस्ती ठूंसे गए बोल्ड सीन्स ने फिल्म को फैमिली ऑडियंस से दूर कर दिया।
 
'टॉक्सिक' की असफलता भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा सबक है। यह साबित करता है कि सिर्फ एक सुपरस्टार का चेहरा और करोड़ों का बजट किसी भी फिल्म को हिट कराने की गारंटी नहीं हो सकता। जब तक स्क्रीनप्ले में कसावट और कहानी में आत्मा नहीं होगी, तब तक 3000 करोड़ तो क्या, 300 करोड़ कमाना भी लोहे के चने चबाने जैसा होगा।
लेखक के बारे में
समय ताम्रकर
समय ताम्रकर फिल्म समीक्षक हैं, जो फिल्म, कलाकार, निर्देशक, बॉक्स ऑफिस और फिल्मों से जुड़े पहलुओं पर गहन विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं।.... और पढ़ें
अगला लेख
अमिताभ बच्चन और सैफ अली खान का क्या है रिश्ता? KBC 18 में बिग बी ने खोला राज