मधुमेह और योग

वक्रासन : पैर लंबे करके जमीन पर बैठकर एक पैर मोड़कर दूसरे पैर के घुटने के पास पंजा जमाकर खड़ा करें। दूसरा हाथ घुटने के ऊपर से घुमाते हुए लंबे पैर का घुटना पकड़ें और कमर घुमाएँ। 10 श्वास के लिए रुकें और दूसरी तरफ से करें।


शशकासन : वज्रासन में बैठकर सामने हाथों को फैलाकर झुकें और माथा जमीन पर लगाने की चेष्टा करें। 10-20 श्वास-प्रश्वास करें। पुट्ठे न उठाएँ।

धनुरासन : पेट के बल लेटकर टखने पकड़कर गर्दन, सिर, छाती घुटनों और जंघाओं को ऊपर उठाएँ। 10 श्वास-प्रश्वास करें और धीरे-धीरे नीचे उतरें।

उत्तानपादासन : पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को बिना मोड़े 45 डिग्री पर उठाकर 10-15 श्वास-प्रश्वास करें, इसे दोहराएँ।


उत्तानपादांगुष्ठासन : पीठ के बल लेटकर दोनों पैर, दोनों हाथ, गर्दन, सिर, छाती ऊपर उठाकर अँगूठे छूने का प्रयास करते हुए 10 श्वास-प्रश्वास करें।
पवनमुक्तासन : घुटनों को मोड़कर पकड़ें और पेट की तरफ खींचें। (ठोड़ी) दाढ़ी घुटने से लगाने का प्रयास करें। 10 श्वास-प्रश्वास करें।

शवासन : विश्राम लेकर 5 मिनट शरीर को ढीला छोड़कर 10 लंबी गहरी, 30 साधारण श्वास-प्रश्वास करें। फिर उठ जाएँ।

भस्त्रिका प्राणायाम : कमर, गर्दन सीधी रखकर जल्दी-जल्दी गहरी श्वास लेना, छोड़ना दोनों नथूनों से करें और गहरी श्वास अंदर खींचकर यथाशक्ति रोकें और धीरे-धीरे छोड़ें। 3 आवर्तक इसी प्रकार करें।
कपालभाँति : झटके से श्वास को बाहर फेंकें और साथ में पेट को पीछे चिपकाएँ। जल्दी-जल्दी इसी को 50 से 100 बार करें।

अनुलोम-विलोम : एक नाक से धीरे-धीरे लंबी गहरी श्वास लेकर दूसरी नाक से धीरे-धीरे छोड़ें, फिर उसी नाक से श्वास भरकर पहले नाक से छोड़ें। इस प्रकार 10 बार करें।

इतना योग का अभ्यास मधुमेह के निवारण के लिए पर्याप्त है।



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