दिल्‍ली की हवाओं में घुल रहा है जहर

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दिल्‍ली श्‍ाहर में एक बार फिर प्रदूषण भयावह स्‍तर पर पहुँच चुका है। संभव है, दिल्‍ली में बढ़ रहे प्रदूषण की वजह से अस्‍थमा के प्रति जागृति आए। शहर में चल रही सीएनजी की योजना असफल होने की कगार पर पहुँच रही है। वायु प्रदूषण अपनी रफ्तार से बढ़ रहा है। कई चीजें दाँव पर लगी हुई हैं, जैसे 2010 में दिल्‍ली में आयोजित होने वाले कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स और हमारा स्‍वास्‍थ्‍य। शहर को जल्‍द ही इन नुकसानों पर लगाम कसनी होगी। हमारी अगली पीढ़ी को सुधार करने के लिए कुछ कड़े कदम उठाने होंगे। लचर विकल्‍प तो असफल हो चुके हैं। कारों और वाहनों की बढ़ती संख्‍या पर रोक लगाना ही शहर के लिए एकमात्र विकल्‍प है।

दिल्‍ली शहर में चलाया जा रहा सीएनजी कार्यक्रम असफल हो रहा है और प्रदूषण का स्‍तर पुन: वर्ष 2000 के स्‍तर तक पहुँच चुका है। सीएसई के एक नए अध्‍यन में यह बात सामने आई है कि पिछले कुछ सालों से हवा में फैले प्रदूषण पर जो नियंत्रण प्राप्‍त किया गया था, वह पुन: उसी स्थिति पर पहुँच गया है। पिछली ठंड में प्रदूषण का स्‍तर पहली बार बढ़ा था और इस साल य‍ह स्‍तर पहले से काफी उच्‍च स्‍तर पर पहुँच चुका है, जैसा कि यह शहर सीएनजी के पहले था।

सीएसई की निदेशक सुनीता नारायण का कहना है, ''हम लोग वायु प्रदूषण को जल्‍द-से-जल्‍द रोकने के लिए उच्‍चस्‍तरीय पैमानों का प्रयोग
2006-07 की ठंड में इसका स्‍तर 350 माइक्रोग्राम प्रति क्‍यूबिक मीटर पर पहुँच गया था। यह स्‍तर अब तक के किसी भी जाड़े की तुलना में सर्वाधिक था
करेंगे, वरना दिल्‍ली शहर सीएनजी से पहले के दिनों वाली स्थिति में पहुँच जाएगा, घुटन और धुँए से भरा हुआ। डीजल से चलने वाली बसों और गाडि़यों के धुँए ने दिल्‍ली को पृथ्‍वी के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक बना दिया था।''


2002 में जब राजधानी में सीएनजी कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी, तब शहरी क्षेत्रों में अवांछित कणों (आरएसपीएम या पीएम10) की मात्रा प्रति क्‍यूबिक मीटर में 143 माइक्रोग्राम थी, लेकिन 2005 में यह घटकर 115 माइक्रोग्राम रह गई। 2006 में इसके बढ़ते स्‍तर पर तब ध्‍यान गया, जब यह मात्रा बढ़कर 136 क्‍यूबिक मीटर हो हो गई थी।

WD|
सीएसई ने चेतावनी दी है कि दिल्‍ली शहर में प्रदूषण का स्‍तर खतरनाक सीमा तक बढ़ चुका है। इस दिशा में शीघ्र ही कोई महत्‍वपूर्ण कदम उठाए जाने की आवश्‍यकता है। शुद्ध वायु में जीना और साँस लेना प्रत्‍येक मनुष्‍य का अधिकार है। हमें अपने इस मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए प्रयत्‍न करना होगा।
2006-07 की ठंड में इसका स्‍तर 350 माइक्रोग्राम प्रति क्‍यूबिक मीटर पर पहुँच गया था। यह स्‍तर अब तक के किसी भी जाड़े की तुलना में सर्वाधिक था।



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