गौरी खान : दीर्घ सूत्री महिला

gouri khan
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का जन्म पूर्वाषाढ़ा में होने की वजह से ही उनका आज सम्मान है और सुखी व विख्यात हैं। गौरी खान का जिस समय जन्म हुआ उस समय सूर्य जिस स्थान पर विराजमान था, ऐसा व्यक्ति दुबला-पतला और दीर्घ सूत्री होता है। साथ ही वह क्रोधी प्रवृत्ति का होता है। इसी कारण गौरी खान आज दीर्घ सूत्री अर्थात अपनी सोच से आगे तक प्रगति करने वाली महिला हैं।

चंद्रमा की स्थि‍ति जिस स्थान पर है, उसी के फलस्वरूप गौरी आज ‍धनधान्य से संपन्न हैं। धनु राशि का चंद्रमा कुंडली में विराजमान है। इसी के प्रभाव स्वरूप आज गौरी कलाकार (फैशन डिजाइनर) हैं क्योंकि ऐसा व्यक्ति कवि, कलाकार और धनवान होता है। गौरी आज धन से भी सुखी हैं। गौरी खान के जन्म के समय बुध जिस स्थान पर विराजमान है, उसी के प्रभाव से व्यक्ति दूसरों के कष्टों का निवारण करता है। यह गुण गौरी में है। जिस समय गौरी का जन्म हुआ उस समय गुरु तुला राशि में विराजमान थे और कुंडली में जिस स्थान पर विराजमान हैं उसी के कारण वे वैभव-संपन्न हैं।

  गौरी खान का जिस समय जन्म हुआ उस समय सूर्य जिस स्थान पर विराजमान था, ऐसा व्यक्ति दुबला-पतला और दीर्घ सूत्री होता है। साथ ही वह क्रोधी प्रवृत्ति का होता है। इसी कारण गौरी खान आज दीर्घ सूत्री अर्थात अपनी सोच से आगे तक प्रगति करने वाली महिला हैं।      
गौरी की कुंडली में ग्रहों की स्थिति उनके कवि एवं या कलाकार की भूमिका निर्धारित करती है। इस कुंडली के अनुसार जातक कवि, लेखक, साहित्यकार अथवा कलाकार बनता है। विशेषकर अपना प्रभाव बनाता है। ऐसे क्षेत्र में जाता है जहाँ लोग मान-सम्मान देते हैं और प्रभावित होते हैं। इसी प्रकार गौरी की कुंडली में शुक्र जिस स्थान पर विराजमान है उसके फलस्वरूप जातक बुद्धिमान, धनवान और क्षमादान वाला होता है एवं आनन सुंदर होता है। शुक्र का तुला राशि में विराजमान होना भी सुख प्रदान करता है। ये सभी गुण गौरी में हैं। परंतु शनि के कारण रोगी हो सकती हैं।

Author पं. सुरेन्द्र बिल्लौरे|
वर्तमान में गौरी की राशि पर राहु की महादशा (18 वर्ष) चल रही है। यह 22 दिसंबर 2005 से प्रारंभ हुई थी जो 22 दिसंबर 2023 तक चलेगी। राहु की महादशा में राहु की अंतरदशा 4 सितंबर 3008 तक रही। गुरु की अंतरदशा 28 जनवरी 2011 तक रहेगी।



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