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vishwakarma puja Arti : श्री विश्वकर्मा जी की 4 आरती एक साथ यहां मिलेगी

मंगलवार,सितम्बर 17, 2019
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श्री विश्वकर्मा विश्व के भगवान सर्वाधारणम्। शरणागतम् शरणागतम् शरणागतम् सुखाकारणम्।। कर शंख चक्र गदा मद्दम त्रिशुल ...
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श्री भगवान विश्वकर्मा चालीसा- भगवान विश्वकर्मा का चालीसा। श्री विश्वकर्म प्रभु वन्दऊं, चरणकमल धरिध्यान। श्री, शुभ, बल ...
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भगवान विश्वकर्मा जी की आरती। ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा। सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ॥ ...
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आरती राधाजी की कीजै। टेक... कृष्ण संग जो कर निवासा, कृष्ण करे जिन पर विश्वासा। आरती वृषभानु लली की कीजै। ...
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राधाजी का कवच श्रीब्रह्मवैवर्त पुराण से लिया गया है। कृष्णप्रिया राधाजी को वृंदावन की अधीश्वरी माना जाता है। अत: कृष्ण ...
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कृष्णप्रिया राधा की पवित्र आरती- आरती राधाजी की कीजै। टेक... कृष्ण संग जो कर निवासा, कृष्ण करे जिन पर विश्वासा।
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ॐ नमस्ते गणपतये। त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि त्वमेव केवलं कर्ताऽसि त्वमेव केवलं धर्ताऽसि त्वमेव केवलं हर्ताऽसि
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यह 108 गजानन नाम श्री गणेश को प्रसन्न करते हैं और वे यश, कीर्ति, पराक्रम, वैभव, ऐश्वर्य, सौभाग्य, सफलता, धन, धान्य, ...
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Ganesh Chalisa- जय गणपति सद्गुण सदन कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण जय जय गिरिजालाल॥ जय जय जय गणपति राजू। मंगल भरण ...
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शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको। दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहरको। हाथ लिए गुडलद्दु सांई सुरवरको।
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गणपति की आरती- जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥
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यश, सुख, समृद्धि, धन-वैभव, पराक्रम, सफलता, खुशी, संतान, नौकरी, प्रेम जैसे 10 बड़े आशीष पाने हैं तो जन्माष्टमी के दिन ...
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श्री कृष्ण अष्टकम् पढ़ें सम्पूर्ण श्लोक- चतुर्मुखादि-संस्तुं समस्तसात्वतानुतम्‌। हलायुधादि-संयुतं नमामि राधिकाधिपम्‌॥1॥
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कृष्ण स्तुति नमो विश्वस्वरूपाय विश्वस्थित्यन्तहेतवे। विश्वेश्वराय विश्वाय गोविन्दाय नमो नमः॥1॥
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कृष्णजी की आरती- आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की। गले में बैजन्तीमाला बजावैं मुरलि मधुर बाला॥
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Jain Chalisa- शीश नवा अरिहंत को, सिद्धन करूं प्रणाम। उपाध्याय आचार्य का ले सुखकारी नाम। सर्व साधु और सरस्वती, जिन मंदिर ...
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वन्देऽहं शीतलां-देवीं, रासभस्थां दिगम्बराम् । मार्जनी-कलशोपेतां, शूर्पालङ्कृत-मस्तकाम् ।।1।। वन्देऽहं शीतलां-देवीं, ...
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मां शीतला एक प्रसिद्ध हिन्दू देवी हैं। इस देवी की महिमा प्राचीनकाल से ही बहुत अधिक है। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं ...
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ॐ रक्ष-रक्ष जगन्माते देवि मङ्गल चण्डिके। हारिके विपदार्राशे हर्षमंगल कारिके।। हर्षमंगल दक्षे च हर्षमंगल दायिके।
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