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गंगा दशहरा कब है ? घर पर ही करें यह पवित्र आरती

शुक्रवार,जून 11, 2021
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हिन्दू धर्म संस्कृति में सूर्य की उपासना करने का विशेष महत्व माना गया है। सूर्य ग्रहण पर यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं सूर्य चालीसा का संपूर्ण पाठ, अवश्‍य पढ़ें...
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यह सूर्य कवच शरीर को आरोग्य देने वाला है तथा संपूर्ण दिव्य सौभाग्य को देने वाला है।
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भगवान शनि की आरती- ॐ जय जय शनि महाराज, स्वामी जय जय शनि महाराज। कृपा करो हम दीन रंक पर, दुःख हरियो प्रभु आज ॥ॐ॥
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श्री हनुमान चालीसा (हिन्दी अर्थ सहित) - श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।
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यह आरती करने से श्री हरि विष्णु प्रसन्न होकर खुशहाल जीवन का आशीर्वाद देते हैं। यहां पढ़ें ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे...
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इंद्रा‍दि देवताओं के बाद धरती पर सर्वप्रथम विभीषण ने ही हनुमानजी की शरण लेकर उनकी स्तुति की थी। विभीषण को भी हनुमानजी की तरह चिरंजीवी होने का वरदान मिला है। वे भी आज सशरीर जीवित हैं। विभीषण ने हनुमानजी की स्तुति में एक बहुत ही अद्भुत और अचूक स्तोत्र ...
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माता सीता की आरती- आरति श्रीजनक-दुलारी की
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यह आरती करने से श्री हरि विष्णु प्रसन्न होकर खुशहाल जीवन का आशीर्वाद देते हैं। यहां पढ़ें ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे...
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श्री जानकी स्तुति- भई प्रगट कुमारी भूमि-विदारी जनहितकारी भयहारी। अतुलित छबि भारी मुनि-मनहारी जनकदुलारी सुकुमारी।।
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जय गंगा मैया मां जय सुरसरी मैया। भवबारिधि उद्धारिणी अतिहि सुदृढ़ नैया।।
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देवि! सुरेश्वरि! भगवति! गंगे! त्रिभुवनतारिणि तरलतरंगे। शंकरमौलिविहारिणि विमले मम मतिरास्तां तव पदकमले ॥1 ॥ हे देवी! सुरेश्वरी! भगवती गंगे! आप तीनों लोकों को तारने वाली हैं। शुद्ध तरंगों से युक्त, महादेव शंकर के मस्तक पर विहार करने वाली हे ...
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गंगा सप्तमी के पावन अवसर पर अगर आप नदी में स्नान करने का पुण्य लाभ नहीं ले पा रहे हैं तो इस स्तोत्र का घर में स्नान करते समय वाचन करें
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ॐ जय गंगे माता, श्री गंगे माता। जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता। ॐ जय गंगे माता...
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जय जग जननि अघ खानी, आनन्द करनि गंग महरानी । जय भागीरथि सुरसरि माता, कलिमल मूल दलनि विखयाता ।।
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परशुराम जयंती के दिन उनका यह स्तवन का पाठ अवश्य करना चाहिए।
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शनि साढ़ेसाती, ढैया अथवा शनि महादशा के दौरान शनि चालीसा, दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए। शिव पुराण के अनुसार अयोध्या के राजा दशरथ ने भी शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए 'शनि चालीसा' का पाठ किया था।
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Hanuman ji ki Aarti- आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।
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श्री हनुमान चालीसा का एक-एक शब्द प्रभावशाली है। प्रतिदिन सुबह और संध्यावंदन के समय पवित्र भावना और शांतिपूर्वक हनुमान चालीसा पढ़ने से हनुमानजी की कृपा प्राप्त होती है, जो हमें हर तरह की होनी-अनहोनी से बचाती है।
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किसी भी प्रकार का कैसा भी बड़ा और भीषण संकट हो संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ अत्यंत प्रभावकारी है। इस पाठ से हर बाधा का नाश होता है और संकटों का अंत होता है।
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