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Lord Shiva Aarti : श्रावण मास में इस आरती के बिना अधूरी है शिवजी की पूजा

शनिवार,जुलाई 24, 2021
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जय गुरुदेव अमल अविनाशी, ज्ञानरूप अन्तर के वासी, पग पग पर देते प्रकाश, जैसे किरणें दिनकर कीं।
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यह आरती करने से श्री हरि विष्णु प्रसन्न होकर खुशहाल जीवन का आशीर्वाद देते हैं। यहां पढ़ें ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे...
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देवी दुर्गा कवच का पाठ हिंदी में प्रस्तुत है...इस पाठ से शरीर के समस्त अंगों की रक्षा होती है, यह पाठ महामारी से बचाव की शक्ति देता है,यह पाठ सम्पूर्ण आरोग्य का शुभ वरदान देता है...यह अत्यंत गोपनीय पाठ है इसे पूरी पवित्रता से किया जाना चाहिए...
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"ॐ जय शिव ओंकारा" की आरती आप शिव जी मानते आए हैं लेकिन सच तो है कि यह केवल शिवजी की आरती नहीं है बल्कि ब्रह्मा विष्णु महेश तीनों की आरती है ...
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इस वर्ष गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व रविवार, 11 जुलाई से शुरू हो रहा है। यहां सभी पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं पवित्र श्री दुर्गा चालीसा। 9 दिनों तक इसके नित्य पाठ से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और हर तरह के संकट दूर करती है।
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11 जुलाई से आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व पर शुरू हो रहा है। मान्यता है कि नवरात्रि के समय पूरे 9 दिनों तक प्रतिदिन सुबह-शाम देवी मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना के बाद
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यह आरती करने से श्री हरि विष्णु प्रसन्न होकर खुशहाल जीवन का आशीर्वाद देते हैं। यहां पढ़ें ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे...
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मां गायत्री देवी की स्तुति में लिखी गई चालीस चौपाइयों की एक रचना है 'गायत्री चालीसा'
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हिन्दू धर्म में गंगा दशहरा का विशेष महत्व होता है। प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है।
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शुक्रवार, 18 जून 2021 को मां धूमावती की जयंती है। इस दिन उनकी यह स्तुति करने वाला कभी धनविहीन नहीं होता व उसे दुःख छूते भी नहीं, बड़ी से बड़ी शक्ति भी पाठ करने वाले के समक्ष नहीं खड़ी हो सकती है।
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श्री हनुमान चालीसा (हिन्दी अर्थ सहित) - श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।
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हिन्दू धर्म संस्कृति में सूर्य की उपासना करने का विशेष महत्व माना गया है। सूर्य ग्रहण पर यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं सूर्य चालीसा का संपूर्ण पाठ, अवश्‍य पढ़ें...
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यह सूर्य कवच शरीर को आरोग्य देने वाला है तथा संपूर्ण दिव्य सौभाग्य को देने वाला है।
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भगवान शनि की आरती- ॐ जय जय शनि महाराज, स्वामी जय जय शनि महाराज। कृपा करो हम दीन रंक पर, दुःख हरियो प्रभु आज ॥ॐ॥
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इंद्रा‍दि देवताओं के बाद धरती पर सर्वप्रथम विभीषण ने ही हनुमानजी की शरण लेकर उनकी स्तुति की थी। विभीषण को भी हनुमानजी की तरह चिरंजीवी होने का वरदान मिला है। वे भी आज सशरीर जीवित हैं। विभीषण ने हनुमानजी की स्तुति में एक बहुत ही अद्भुत और अचूक स्तोत्र ...
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माता सीता की आरती- आरति श्रीजनक-दुलारी की
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श्री जानकी स्तुति- भई प्रगट कुमारी भूमि-विदारी जनहितकारी भयहारी। अतुलित छबि भारी मुनि-मनहारी जनकदुलारी सुकुमारी।।
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जय गंगा मैया मां जय सुरसरी मैया। भवबारिधि उद्धारिणी अतिहि सुदृढ़ नैया।।
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देवि! सुरेश्वरि! भगवति! गंगे! त्रिभुवनतारिणि तरलतरंगे। शंकरमौलिविहारिणि विमले मम मतिरास्तां तव पदकमले ॥1 ॥ हे देवी! सुरेश्वरी! भगवती गंगे! आप तीनों लोकों को तारने वाली हैं। शुद्ध तरंगों से युक्त, महादेव शंकर के मस्तक पर विहार करने वाली हे ...
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