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श्री नारायण स्तोत्र : विष्‍णु जी को अतिप्रिय है यह Narayana Stotram, पढ़ें सरल पाठ

मंगलवार,सितम्बर 22, 2020
Vishnu Jee Worship
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पुरुषोत्तम मास में पूरे माह तक प्रतिदिन भगवान श्रीविष्णु की यह आरती करने से हरि प्रसन्न होकर खुशहाल जीवन का वरदान देते हैं। यहां पढ़ें आरती...
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जो मनुष्य अधिकमास में केवल एक बार श्रीकृष्ण के गुणों में प्रेम करने वाले अपने चित्त को श्रीकृष्ण के चरण कमलों में लगा देते हैं, वे पापों से छूट जाते हैं, फिर उन्हें पाश हाथ में लिए हुए यमदूतों के दर्शन स्वप्न में भी नहीं होते।
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अधिक मास में करें श्री कृष्णस्तोत्र वाचन- रक्ष रक्ष हरे मां च निमग्नं कामसागरे। दुष्कीर्तिजलपूर्णे च दुष्पारे बहुसंकटे॥1॥ भक्तिविस्मृतिबीजे च विपत्सोपानदुस्तरे। अतीव निर्मलज्ञानचक्षुः-प्रच्छन्नकारणे॥2॥
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प्रतिदिन प्रात:शुद्ध होकर गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करने से गणेश जी की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।
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भगवान श्री गणेश की पूजा के बिना हिंदू धर्म में कोई भी पूजा पूरी नहीं मानी जाती। गणेशोत्सव के दिनों में इन आरतियों से करें भगवान श्री गणेश को प्रसन्न। यहां आपके लिए प्रस्तुत हैं गणेश जी की 3 विशेष आरतियां...
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प्रति वर्ष अश्विनी मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। इस संबंध में धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। यहां आपके लिए प्रस्तुत हैं भगवान विश्वकर्मा को प्रसन्न करने के लिए उनकी 4 ...
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भगवान विश्वकर्मा का चालीसा। श्री विश्वकर्म प्रभु वन्दऊं, चरणकमल धरिध्यान। श्री, शुभ, बल अरु शिल्पगुण, दीजै दया निधान।। जय श्री विश्वकर्म
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आज एकादशी है। ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे। यह आरती करने से श्रीहरि विष्णु प्रसन्न होकर खुशहाल जीवन का आशीर्वाद देते हैं। यहां पढ़ें आरती...
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महालक्ष्मी व्रत भाद्रपद शुक्ल अष्टमी तिथि से शुरू होकर 16 दिनों तक चलता है। इस व्रत का समापन आश्विन कृष्ण अष्टमी को किया जाता है। इस व्रत के संबंध में मान्यता है कि अगर कोई महालक्ष्मी का यह व्रत पूरी निष्ठा के साथ करें तो व्यक्ति को सुख-समृद्धि, ...
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ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता । तुमको निस दिन सेवत हर-विष्णु-धाता ॥ॐ जय...
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खुशी, संतान, नौकरी, प्रेम,यश, सुख, समृद्धि, धन-वैभव, पराक्रम, सफलता जैसे 10 बड़े आशीष पाने हैं तो जन्माष्टमी के दिन अवश्य पढ़ें श्री कृष्ण चालीसा...
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आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की। गले में बैजन्तीमाला बजावैं मुरलि मधुर बाला॥
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यहां राधाजी का कवच उपलब्ध है। यह कवच श्रीब्रह्मवैवर्ते पुराण से लिया गया है। कृष्णप्रिया राधाजी को वृंदावन की अधीश्वरी माना जाता है।
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आरती राधाजी की कीजै। टेक... कृष्ण संग जो कर निवासा, कृष्ण करे जिन पर विश्वासा। आरती वृषभानु लली की कीजै। आरती... कृष्णचन्द्र की करी सहाई, मुंह में आनि रूप दिखाई। उस शक्ति की आरती कीजै। आरती... नंद पुत्र से प्रीति बढ़ाई, यमुना तट पर रास
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श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी! राजेश्वरी जय नमो नम:!! करुणामयी सकल अघ हारिणी! अमृत वर्षिणी नमो नम:!! जय शरणं वरणं नमो नम: श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी...! अशुभ विनाशिनी, सब सुखदायिनी! खलदल नाशिनी नमो नम:!! भंडासुर वध कारिणी जय ...
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जयति-जयति जय ललिते माता। तव गुण महिमा है विख्याता।। तू सुन्दरी, त्रिपुरेश्वरी देवी। सुर नर मुनि तेरे पद सेवी।। तू कल्याणी कष्ट निवारिणी। तू सुख दायिनी, विपदा हारिणी।। मोह विनाशिनी दैत्य नाशिनी। भक्त भाविनी ज्योति प्रकाशिनी।।
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Shri Ganesh Chalisa- जय गणपति सद्गुण सदन कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण जय जय गिरिजालाल॥
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ॐ नमस्ते गणपतये। त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि त्वमेव केवलं कर्ताऽसि त्वमेव केवलं धर्ताऽसि त्वमेव केवलं हर्ताऽसि
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शिव आरती- शिवजी का विशेष पूजन कर रहे हैं तो इस आरती के बिना अधूरी है पूजा। आगे पढ़ें...
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