वर्ष 2012 : यूं चलाओ न 'बातों' के बाण रे...

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पुरानी पत्नी में मजा नहीं रहता...
कांग्रेस नेता और केन्द्र में कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल उस समय बड़ी उलझन में फंस गए जब उन्होंने यह कह दिया कि 'नई-नई जीत और नई-नई शादी का अपना अलग ही महत्व होता है। जैसे-जैसे समय बीतेगा जीत पुरानी होती जाएगी। उसी तरह जैसे-जैसे समय बीतता है पत्नी भी पुरानी होती जाती है, फिर वो मजा नहीं रहता है। उनके इस बयान पर उस समय तो ठहाके लगे, लेकिन बाद में कई महिला संगठनों ने उन्हें आड़े हाथों लिया और नेताजी बगलें झांकते नजर आए।
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शब्दबाण चलाने में भारत के राजनेताओं का कोई सानी नहीं है। बोलते समय वे यह भी ध्यान नहीं रखते कि उनके बोल से बवाल मच जाएगा। बाद में अपने ही बयान पर वे मुंह छिपाते नजर आते हैं या फिर उनका रटा-रटाया जवाब होता है कि मेरा बयान तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। बाबा और समाजसेवी भी बयानों से बखेड़ा खड़ा करने के मामले में पीछे नहीं हैं।

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