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नौकासन : आंतें होती हैं मजबूत, हर्निया रोग में लाभदायक

Updated: शनिवार, 21 अक्टूबर 2017 (14:17 IST)
आसन परिचय : इस आसन की अंतिम अवस्था में हमारे शरीर की आकृति नौका समान दिखाई देती है, इसी कारण इसे नौकासन कहते हैं।

सावधानी : शरीर को ऊपर उठाते समय दोनों हाथ-पैर के अंगुठे और सिर का भाग एक सीध में हो। अंतिम अवस्था में पैर के अंगुठे और सिर का भाग सीध में नहीं आता है, तो धीरे-धीरे अभ्यास का प्रयास करें। जिसे स्लिप डिस्क की शिकायत हो उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए। मेरुदंड में कड़ापन या पेट संबंधी गंभीर रोग हो तो भी यह आसन न करें।
 
आसन लाभ : इससे पाचन क्रिया, छोटी-बड़ी आंत में लाभ मिलता है। अंगुठे से अंगुलियों तक खिंचाव होने के कारण शुद्ध रक्त तीव्र गति से प्रभावित होता है, जिससे काया निरोगी बनी रहती है। हर्निया रोग में भी यह आसन लाभदायक माना गया है।
 

 
आसन विधि : पीठ के बल लेट जाते हैं। एड़ी-पंजे मिले हुए दोनों हाथ साइड में हथेलियां जमीन पर तथा गर्दन को सीधी रखते हैं। अब दोनों पैर, गर्दन और हाथों को धीरे-धीरे समानांतर एक-साथ ऊपर की ओर उठाते हैं। अंतिम अवस्था में पूरे शरीर का वजन नितंब के ऊपर रखना चाहिए।
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें
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