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खतरनाक है खेचरी

योग की खेचरी मुद्रा

Updated: गुरुवार, 30 अक्टूबर 2014 (17:41 IST)
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योग में कुछ मुद्राएँ ऐसी है जिन्हें सिर्फ योगी ही करते हैं। सामान्यजनों को इन्हें नहीं करना चाहिए। खेचरी मुद्रा साधकों के लिए मानी गई है।

विधि : इसके लिए जिभ और तालु को जोड़ने वाले माँस-तंतु को धीरे-धीरे काटा जाता है, अर्थात एक दिन जौ भर काट कर छोड़ दिया जाता है। फिर तीन-चार दिन बाद थोड़ा-सा और काट दिया जाता है।

इस प्रकार थोड़ा-थोड़ा काटने से उस स्थान की रक्त शिराएँ अपना स्थान भीतर की तरफ बनाती जाती हैं। जीभ को काटने के साथ ही प्रतिदिन धीरे-धीरे बाहर की तरफ खींचने का अभ्यास किया जाता है।

इसका अभ्यास करने से कुछ महिनों में जीभ इतनी लम्बी हो जाती है कि यदि उसे ऊपर की तरफ लौटा (उल्टा करने) दिया जाए तो वह श्वास जाने वाले छेदों को भीतर से बन्द कर देती है। इससे समाधि के समय श्वास का आना-जाना पूर्णतः रोक दिया जाता है।

लाभ : इस मुद्रा से प्राणायाम को सिद्ध करने और सामधि लगाने में विशेष सहायता मिलती है। साधनारत साधुओं के लिए यह मुद्रा बहुत ही लाभदाय मानी जाती है।

चेतावनी : यह आलेख सिर्फ जानकारी हेतु है। कोई भी व्यक्ति इसे पढ़कर करने का प्रयास ना करें, क्योंकि यह सिर्फ साधकों के लिए है आम लोगों के लिए नहीं।

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें
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