पानी ही पानी है...

परिस्थतियों में बदलाव का काम कोई पुरुष का ही ठेका नहीं है स्त्रियाँ भी इसे बखूबी कर सकती हैं। किस्सा है मध्यप्रदेश के सागर के एक गाँव का। गाँव का नाम गुरैया, बिल्कुल ठेठ गाँव की तरह का गाँव जहाँ यह कहावत आम थी कि 'भोजन तो कर लो लेकिन पानी मत माँगना'। गाँव की एक बहू सीताबाई चौबे ने गाँव के हालात बदलने का बीड़ा उठाया और देखते ही देखते महज एक दशक में गाँव का कायापलट हो गया।
सीताबाई बड़े गर्व से बताती हैं कि जिस बंजर भूमि में जंगली घास भी नहीं उगाई जा सकती थी, वहाँ तालाबों के कारण अब 7 लाख पौधों की नर्सरी लहलहा रही है। यहाँ तक कि सीताबाई चौबे व उनके सोनिया स्व-सहायता समूह के कार्यों की दिग्विजयसिंह व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने भी प्रशंसा की थी तथा विशेषाधिकार दिया कि जब भी दिल्ली आएँ, उनसे जरूर मिलें। अब सीता का गाँव प्यासा नहीं है और उनकी बगिया उनकी मेहनत के दम पर लहलहा रही है।



और भी पढ़ें :