हमारे बीच कुछ है
प्रेम को चिरकालीन बनाएँ
- पद्मा राजेंद्र
अटूट विश्वास, गहरी आस्था, निःस्वार्थ प्रेम और एक-दूसरे के प्रति समर्पण की गहन भावना... मोहब्बत के सागर के ये मोती ही तो दांपत्य जीवन के रिश्ते को अनमोल बनाते हैं। नींद उड़ने, चैन खोने और तसव्वुर में एक ही चेहरे के होने का कारण सच्चा प्यार ही है और कुछ नहीं।
मेरी मित्र जिसे फिर किसी से प्रेम हो गया है, वह बड़ी गंभीरता से दावा करती है कि उसे आकाश का रंग कुछ और नीला दिखाई देने लगा है। रोमांटिक संगीत सुनकर उसकी आँखों में आँसू छलक आते हैं। उसने अपना वजन आठ किलो कम कर लिया है और उसका शरीर इतना छरहरा हो गया है कि वह किसी मॉडल की तरह सुंदर नजर आने लगी है। "मेरा यौवन लौट आया है", वह उत्साह में आकर गुनगुनाती है, 'अभी तो मैं जवान हूँ...'।
मेरी सखी अपने नए प्यार के तराने गाने लगी तो मैंने अपने पुराने प्रेम पर ही दृष्टिपात किया। पिछले वर्षों में मेरा वजन काफी बढ़ गया है। घने लहराते बाल भी रुखसत हो चुके हैं। फिर भी हम पति-पत्नी जब एक-दूसरे की ओर देखते हैं तो उनकी वह एक नजर मेरे दिल की धड़कनें कुछ ऐसी बढ़ा देती हैं कि मेरा भी मन होता है गुनगुनाऊँ, मुस्कुराऊँ, खिलखिलाऊँ।
मेरी मित्र ने मुझसे पूछा, 'मेरा यह प्रेम किन बातों पर सदा सर्वदा बना रह सकता है?' तो मुझे मोटे तौर पर अनेक उत्तर भी सूझे, जैसे समान रुचियाँ, विश्वसनीयता, प्रतिबद्धता, आदरभाव, निःस्वार्थ भावना, एक-दूसरे से खुलकर बात कर रुकने की क्षमता आदि, किंतु इनके अलावा भी तो बहुत-से कारक होते हैं।
हम अभी भी जो समय साथ-साथ गुजारते हैं, वे मधुर होते हैं और कभी-कभी अप्रत्याशित रूप से मजेदार तो कभी तनावपूर्ण भी। कई बार जब कोई काम मिलकर करते हैं तो मजा भी आता है। हमें तो बस एक-दूसरे का साथ अच्छा लगता है, इसी में आनंद आता है तो कई बार हम एक-दूसरे को चौंकाने में भी नहीं चूकते। हम दोनों एक-दूसरे को समझते भी हैं। मैं बखूबी समझती हूँ कि उनका अपने मित्रों के साथ समय बिताना भी आवश्यक है और वे भी इस बात को समझते हैं कि जब कभी मैं घर से बाहर जाऊँ, वे बच्चों को संभालें।
हमारे बीच परस्पर क्षमा का भाव भी है। एक-दूसरे की कई बचकानी हरकतें भी हम नजरअंदाज कर जाते हैं तो हम में एक भावनात्मक तारतम्य भी है। कुछ दिन पहले जब वे ऑफिस से आए तो उनकी नजरें मुझसे कह रही थीं कि उनका दिन बहुत कठिन गुजरा है। उन्होंने बताया कि पेंशन लेने आए बुजुर्गों की व्यथा उन्हें अंदर तक तोड़ देती है। बच्चों से त्रस्त, पत्नी व स्वयं की बीमारी से ग्रस्त उन बुजुर्गों को वे कैसे सांत्वना दें, जबकि उनकी ही आँखें तरल हो उठती हैं।
उस समय मेरी भी आँखों में कुछ आँसू तिर आए। वे आँसू सामाजिक, पारिवारिक व स्वास्थ्यपरक समस्याओं के आगे हमारी असमर्थता व सीमाओं के कारण थे। आँसू इस बात पर थे कि अभी भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो अपने वृद्ध माता-पिता की कद्र नहीं करते। वे आँसू इस कारण भी बहे थे कि मेरे पति बैंक के नीरस व उबाऊ कामकाज के आदी हो जाने के इतने वर्ष बाद भी किसी की परेशानी पर द्रवित हो जाया करते हैं और वह परेशानी हमारा साझा दुःख बन जाती है।
फिर हमारी साझी आस्था भी तो है। पिछले सोम को मेरे पति के सहकर्मी ने बताया कि उनकी पत्नी कैंसर के विरुद्ध अपने संघर्ष में स्वयं को अब थका-हारा महसूस करने लगी है। मंगल को मैं अपनी एक ऐसी सहेली के साथ थी, जो तलाक के बाद अपने जीवन को फिर से पटरी पर लाने के लिए संघर्ष कर रही थी।
बुध को मेरी ननद का फोन आया कि उनके देवर का किडनी फेल हो जाने की वजह से देहांत हो गया। गुरुवार को मेरे पति के अभिन्न मित्र, जो अभी-अभी सफल हार्ट सर्जरी करवाकर लौटे थे, के निधन की खबर से हम सब हिल गए। शुक्रवार को मेरे बचपन की एक सहेली ने अपने पिता की मृत्यु का हृदयविदारक समाचार दिया। मैंने रिसीवर रखा तो सोच में पड़ गई, कुल एक सप्ताह के हिसाब से कुछ अधिक ही दुःखदायी घट गया लगता है।
कुछ देर ईश्वर का स्मरण करने के बाद मैं बालकनी में गई तो अपने आँसुओं के बीच मैंने सड़क पर क्रिकेट खेलते बच्चों का मस्तीभरा शोर सुना। गार्डन की हरियाली के बीच खिलते पुष्पों को देखा। ड्राइंग रूम में बैठे अपने पुत्र और उसके मित्रों की हँसी की खनखनाहट सुनी। दरवाजे के बाहर झाँकने पर पड़ोसी की बेटी को अपने डॉगी के साथ बॉल खेलते देखा।
उस रात मैंने इनको सारी घटनाओं के बारे में बताया। हमने जीवनक्रम के बारे में विचार-विमर्श किया। एक-दूसरे को समझाया कि विषाद के प्रतिकार के लिए हर्ष भी आता है, खुशी भी लाता है और जीवन की गति बनाए रखने के लिए यही विश्वास काफी है। एक-दूसरे के प्रति हमारी आस्था इसके बाद और दृढ़ हो गई और यह दृढ़तर होती ही जाती है।
इन सबके अलावा हम एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते भी हैं। मैं जानती हूँ कि वे देर तक टीवी देखेंगे, अपना कोई सामान जगह पर नहीं रखेंगे। उधर वे भी जानते हैं कि मैं 'खाना जल्दी खा लो' की गुहार लगाए बिना नहीं मानूँगी, सिर पर स्कॉर्फ बाँधे बिना नहीं सोऊँगी, अपना आइसक्रीम प्रेम नहीं छोड़ूँगी। मैं सोचती हूँ कि हमारा प्रेम इसलिए कायम है, क्योंकि वह आरामदेह है। नहीं, आकाश का रंग बिलकुल गहरा नीला नहीं है, वह अब भी आसमानी ही है।
हम अपने को कोई विशेष युवा भी महसूस नहीं करते। हमने इतना कुछ भोगा है, सहा है कि वह हमारे विकास और बुद्धि-विवेक की अभिवृद्धि में सहायक ही सिद्ध हुआ है। इसका प्रभाव हमारे शरीर पर भी पड़ा है और वह हमारी स्मृतियों का एक अटूट हिस्सा बन गया है। मुझे विश्वासभरी उम्मीद है कि हमारे पास वह सब कुछ है, जो प्रेम को चिरकालीन बनाता है। मुश्किलों से लड़ने का साहस जगाता है। हाँ, यही प्यार हमें एक-दूसरे के और करीब लाता है।
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मेरी मित्र जिसे फिर किसी से प्रेम हो गया है, वह बड़ी गंभीरता से दावा करती है कि उसे आकाश का रंग कुछ और नीला दिखाई देने लगा है। रोमांटिक संगीत सुनकर उसकी आँखों में आँसू छलक आते हैं। उसने अपना वजन आठ किलो कम कर लिया है और उसका शरीर इतना छरहरा हो गया है कि वह किसी मॉडल की तरह सुंदर नजर आने लगी है। "मेरा यौवन लौट आया है", वह उत्साह में आकर गुनगुनाती है, 'अभी तो मैं जवान हूँ...'।
मेरी सखी अपने नए प्यार के तराने गाने लगी तो मैंने अपने पुराने प्रेम पर ही दृष्टिपात किया। पिछले वर्षों में मेरा वजन काफी बढ़ गया है। घने लहराते बाल भी रुखसत हो चुके हैं। फिर भी हम पति-पत्नी जब एक-दूसरे की ओर देखते हैं तो उनकी वह एक नजर मेरे दिल की धड़कनें कुछ ऐसी बढ़ा देती हैं कि मेरा भी मन होता है गुनगुनाऊँ, मुस्कुराऊँ, खिलखिलाऊँ।
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हम अभी भी जो समय साथ-साथ गुजारते हैं, वे मधुर होते हैं और कभी-कभी अप्रत्याशित रूप से मजेदार तो कभी तनावपूर्ण भी। कई बार जब कोई काम मिलकर करते हैं तो मजा भी आता है। हमें तो बस एक-दूसरे का साथ अच्छा लगता है, इसी में आनंद आता है तो कई बार हम एक-दूसरे को चौंकाने में भी नहीं चूकते। हम दोनों एक-दूसरे को समझते भी हैं। मैं बखूबी समझती हूँ कि उनका अपने मित्रों के साथ समय बिताना भी आवश्यक है और वे भी इस बात को समझते हैं कि जब कभी मैं घर से बाहर जाऊँ, वे बच्चों को संभालें।
हमारे बीच परस्पर क्षमा का भाव भी है। एक-दूसरे की कई बचकानी हरकतें भी हम नजरअंदाज कर जाते हैं तो हम में एक भावनात्मक तारतम्य भी है। कुछ दिन पहले जब वे ऑफिस से आए तो उनकी नजरें मुझसे कह रही थीं कि उनका दिन बहुत कठिन गुजरा है। उन्होंने बताया कि पेंशन लेने आए बुजुर्गों की व्यथा उन्हें अंदर तक तोड़ देती है। बच्चों से त्रस्त, पत्नी व स्वयं की बीमारी से ग्रस्त उन बुजुर्गों को वे कैसे सांत्वना दें, जबकि उनकी ही आँखें तरल हो उठती हैं।
उस समय मेरी भी आँखों में कुछ आँसू तिर आए। वे आँसू सामाजिक, पारिवारिक व स्वास्थ्यपरक समस्याओं के आगे हमारी असमर्थता व सीमाओं के कारण थे। आँसू इस बात पर थे कि अभी भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो अपने वृद्ध माता-पिता की कद्र नहीं करते। वे आँसू इस कारण भी बहे थे कि मेरे पति बैंक के नीरस व उबाऊ कामकाज के आदी हो जाने के इतने वर्ष बाद भी किसी की परेशानी पर द्रवित हो जाया करते हैं और वह परेशानी हमारा साझा दुःख बन जाती है।
फिर हमारी साझी आस्था भी तो है। पिछले सोम को मेरे पति के सहकर्मी ने बताया कि उनकी पत्नी कैंसर के विरुद्ध अपने संघर्ष में स्वयं को अब थका-हारा महसूस करने लगी है। मंगल को मैं अपनी एक ऐसी सहेली के साथ थी, जो तलाक के बाद अपने जीवन को फिर से पटरी पर लाने के लिए संघर्ष कर रही थी।
बुध को मेरी ननद का फोन आया कि उनके देवर का किडनी फेल हो जाने की वजह से देहांत हो गया। गुरुवार को मेरे पति के अभिन्न मित्र, जो अभी-अभी सफल हार्ट सर्जरी करवाकर लौटे थे, के निधन की खबर से हम सब हिल गए। शुक्रवार को मेरे बचपन की एक सहेली ने अपने पिता की मृत्यु का हृदयविदारक समाचार दिया। मैंने रिसीवर रखा तो सोच में पड़ गई, कुल एक सप्ताह के हिसाब से कुछ अधिक ही दुःखदायी घट गया लगता है।
कुछ देर ईश्वर का स्मरण करने के बाद मैं बालकनी में गई तो अपने आँसुओं के बीच मैंने सड़क पर क्रिकेट खेलते बच्चों का मस्तीभरा शोर सुना। गार्डन की हरियाली के बीच खिलते पुष्पों को देखा। ड्राइंग रूम में बैठे अपने पुत्र और उसके मित्रों की हँसी की खनखनाहट सुनी। दरवाजे के बाहर झाँकने पर पड़ोसी की बेटी को अपने डॉगी के साथ बॉल खेलते देखा।
उस रात मैंने इनको सारी घटनाओं के बारे में बताया। हमने जीवनक्रम के बारे में विचार-विमर्श किया। एक-दूसरे को समझाया कि विषाद के प्रतिकार के लिए हर्ष भी आता है, खुशी भी लाता है और जीवन की गति बनाए रखने के लिए यही विश्वास काफी है। एक-दूसरे के प्रति हमारी आस्था इसके बाद और दृढ़ हो गई और यह दृढ़तर होती ही जाती है।
इन सबके अलावा हम एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते भी हैं। मैं जानती हूँ कि वे देर तक टीवी देखेंगे, अपना कोई सामान जगह पर नहीं रखेंगे। उधर वे भी जानते हैं कि मैं 'खाना जल्दी खा लो' की गुहार लगाए बिना नहीं मानूँगी, सिर पर स्कॉर्फ बाँधे बिना नहीं सोऊँगी, अपना आइसक्रीम प्रेम नहीं छोड़ूँगी। मैं सोचती हूँ कि हमारा प्रेम इसलिए कायम है, क्योंकि वह आरामदेह है। नहीं, आकाश का रंग बिलकुल गहरा नीला नहीं है, वह अब भी आसमानी ही है।
हम अपने को कोई विशेष युवा भी महसूस नहीं करते। हमने इतना कुछ भोगा है, सहा है कि वह हमारे विकास और बुद्धि-विवेक की अभिवृद्धि में सहायक ही सिद्ध हुआ है। इसका प्रभाव हमारे शरीर पर भी पड़ा है और वह हमारी स्मृतियों का एक अटूट हिस्सा बन गया है। मुझे विश्वासभरी उम्मीद है कि हमारे पास वह सब कुछ है, जो प्रेम को चिरकालीन बनाता है। मुश्किलों से लड़ने का साहस जगाता है। हाँ, यही प्यार हमें एक-दूसरे के और करीब लाता है।
