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यदि किचन में कर लिए ये 10 कार्य तो भरे रहेंगे अन्न के भंडार

Updated: सोमवार, 17 मई 2021 (08:38 IST)
किचन अर्थात रसोईघर में वास्तु के कुछ नियम अपनाने से अन्न की कभी भी कमी नहीं होती है। रसोईघर से आपकी सेहत और समृद्धि जुड़ी हुई है। इसीलिए रसोईघर को आप आयुर्वेद और वास्तुशास्त्र के अनुसार जितना अच्छा रख सकते हैं रखें। लेकिन हम आपको यहां बताने जा रहे हैं वास्तु की एक छोटी सी टिप्स जिसके आजमाने से रसोईघर का वास्तुदोष तो दूर होगी ही साथ ही बरकत भी बनी रहेगी और अन्न के भंडार भरे रहेंगे।
 
 
नियम : वास्तुविज्ञान के अनुसार रसोईघर आग्नेय कोण में होना शुभ फलदायी होता है। यदि ऐसा नहीं है तो इससे घर में रहने वाले लोगों की सेहत पर खासतौर पर महिलाओं की सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। अन्न-धन की भी हानि होती है। 

 
अन्न के भंडार भरें रहेंगे : 
 
1. फल, सब्जी और फूल : रसोई घर में किचन स्टेंड के ऊपर सुंदर फलों और सब्जियों के चित्र लगाएं। साथ ही अन्नपूर्णा माता का चित्र भी लगाएं तो घर में बरकत बनी रहेगी।
 
2. गणेशजी की ऐसी तस्वीर : जिन घर में रसोई घर दक्षिण पूर्व यानी आग्नेय कोण में नहीं हो तब वास्तुदोष को दूर करने के लिए रसोई के उत्तर पूर्व यानी ईशान कोण में सिंदूरी गणेशजी की तस्वीर लगानी चाहिए।
 
3. अल्पना : रसोईघर में छींका चौक, मां अन्नपूर्णा की कृपादृष्टि बनी रहे, इस हेतु विशेष फूल के आकार की अल्पना बनती है जिसके 5 खाने बनते हैं। हर खाने में विभिन्न अनाज-धन-धान्य को प्रतीकस्वरूप उकेरा जाता है। गोल आकार में बनी इस अल्पना के बीच में दीप धरा जाता है। अक्सर आप इस तरह की अल्पना या मांडना को गुजरात, मालवा, निमाड़ या राजस्थान के ग्रामीण या आदिवासियों के घरों में देख सकते हैं।
 
4. यज्ञ करते ऋषि : यदि आपका रसोईघर अग्निकोण में न होते हुए किसी ओर दिशा में बना है तो वहां पर यज्ञ करते हुए ऋषियों की चित्राकृति लगाएं।
 
5. अग्निहोत्र कर्म करें : जिस तरह हम जरूतमंदों को अन्न जल देते है उसी तरह हमने जिस अग्नि और जल के माध्यम से यह अन्य बनाया है तो उसे भी अर्पित करें। इसे अग्निहोत्र कर्म कहते हैं। अग्निहोत्र कर्म दो तरह से होता है पहला यह कि हम जब भी भोजन खाएं उससे पहले उसे अग्नि को अर्पित करें। दूसरा तरीका है यज्ञ की वेदी बनाकर हवन किया जाता है।
 
6. भोजन के नियम : भोजन करने के बाद थाली में ही हाथ न थोएं। थाली में कभी जूठन न छोड़े। भोजन करने के बाद थाली को कभी, किचन स्टेन, पलंग या टेबल के नीचे न रखें। उपर भी न रखें। रात्रि में भोजन के जूठे बर्तन घर में न रखें।
 
7. रसोईघर का रंग : आग्नेय की दीवार पर नारंगी रंग कर सकते हैं। दक्षिण-पूर्वी कक्ष में पीले या नारंगी रंग का प्रयोग करना चाहिए।
 
8. रसोईघर में बैठकर ही करें भोजन : वास्तु और ज्योतिष के अनुसार भोजन वहां करना चाहिए जहां रसोईघर हो। इससे राहु और केतु का प्रभाव नहीं होता है। जहां पर कोई छत नहीं है वहां भोजन करने से राहु और केतु के बुरे प्रभाव सक्रिय रहते हैं। लाल किताब में भी रसोईघर में बैठकर ही भोजन करने की सलाह दी जाती है।
 
9. नमक का पोंछा लगाएं : सप्ताह में एक बार किचन में (गुरुवार को छोड़कर) समुद्री नमक से पोंछा लगाने से घर में शांति रहती है। घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होकर घर में झगड़े भी नहीं होते हैं तथा लक्ष्मी का वास स्थायी रहता है।
 
10. रात में ये है वर्जित : रात में चावल, दही और सत्तू का सेवन करने से लक्ष्मी का निरादर होता है अत: समृद्धि चाहने वालों को तथा जिन व्यक्तियों को आर्थिक कष्ट रहते हों, उन्हें इनका सेवन रात के भोजन में नहीं करना चाहिए। भोजन सदैव पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके करना चाहिए।

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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