1. हम समझते हैं आज़माने को उज़्र कुछ चाहिए सताने को संग-ए-दर से तेरे निकाली आग हमने दुश्मन का घर जलाने को Aziz AnsariWD चल के काबे में सजदा कर मोमिनछोड़ उस बुत के आस्ताने को 2. दफ़्न जब खाक में हम सोखता सामाँ होंगे माही के गुल, शम्म-ए-शबिस्ताँ होंगे...