बच्चे उदास बैठे हैं
बच्चे उदास बैठे हैं पिंजरे के आसपास,
जैसे समझ रहे हों परिन्दों की गुफ़्तगू ------- अख़्तर नज़मी
जैसे समझ रहे हों परिन्दों की गुफ़्तगू ------- अख़्तर नज़मी
