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नया आसमां

Written By WD
Updated: रविवार, 1 सितम्बर 2013 (16:08 IST)
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कोई नई ज़मीं हो, नया आसमां भी हो,
ऐ दिल अब उसके पास चलें, वो जहां भी हो
महबूब वो कि सर से क़दम तक ख़ुलूस हो,
आशिक़ वही जो इश्‍क़ से कुछ बदगुमां भी हो।

- फ़िराक़ गोरखपुरी

( ख़ुलूस = निष्‍कपटता)
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