- मनोरंजन
- टीवी
- आलेख
ये हार-जीत कुछ कहती है
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए विश्व कप के अभ्यास मैच के बाद जब न्यूज चैनल "आज तक" पर इस मैच की खबर दिखाई जा रही थी, तब कुछ सेकंड्स के लिए पीछे बैक ड्रॉप में धोनी की मायूस-सी तस्वीर लगी थी और स्लग लिखा था - ये हार कुछ कहती है। ...मगर भारतीय टीम हारी नहीं थी, जीती थी। कुछ देर बाद तस्वीर बदल दी गई, अब धोनी का चेहरा खुशी भरा था। साथ ही खुशी वाली मुद्रा में हरभजनसिंह और पीयूष चावला थे। स्लग था - ये जीत कुछ कहती है। जाहिर है कि तमाम चैनलों ने ये समझ लिया था कि मात्र दो सौ चौदह पर ऑलआउट होने के बाद भारतीय टीम हार रही है। जब ऑस्ट्रेलिया ने सवा सौ रन बना लिए थे, तब भी उसकी हार की संभावनाएँ नहीं थीं। अचानक मैच पलटा और इस तेजी से पलटा कि "आज तक" वाले नया स्लग तक नहीं सोच पाए। जो स्लग हार के लिए तैयार किया था उसी का एक शब्द बदल कर जीत के लिए इस्तेमाल कर लिया गया। अब हमें इन्हीं अपरिपक्व और जल्दबाज न्यूज चैनलों के साथ सभी मैच देखने हैं। बेहतर हो कि हम कुछ ऐसे चैनल चुन लें, जहाँ मैच की समीक्षा चीख-चीख कर नहीं की जाती हो। मैच में हार-जीत तो चलती ही है। मगर इन जल्दबाज न्यूज चैनलों का रवैया यह रहता है कि यदि टीम जीत गई तो उसे विश्वविजेता के सिंहासन पर बैठा देते हैं और अगर कम स्कोर पर आउट भी हो गई तो आधे मैच में ही खिलाड़ियों को ऐसे कोसने लगते हैं कि लगता है कोई निजी बैर है। न्यूज चैनल वाले हमेशा हिस्टीरिया की मनोदशा में पाए जाते हैं। बोलने और लिखने में वाकई फर्क होता है। आप गुस्से में जब बोलते हैं तो गाली दे सकते हैं, मगर आप कितने ही गुस्से में क्यों न खत लिख रहे हों, गालियाँ नहीं देते। लिखने के लिए बैठते ही आपका संबंध विवेक से बनने लगता है। एक शालीनता है, जो आपको घेर लेती है। अगर आपने कुछ ऐसा लिख दिया है, जो नहीं लिखना चाहिए था, तो आप संभल जाते हैं। लिखे हुए को एडिट किया जा सकता है, पर बोले हुए को नहीं। क्रिकेट देखने वाले अधेड़ लोगों की जान एक तरह से खतरे में है। सबसे पहले तो रोमांचक मैच दिल की धड़कन बढ़ा सकते हैं। फिर यदि टीम हार गई तो चैनल वाले ऐसा माहौल बना देंगे कि कमजोर दिल दिमाग के लोग डिप्रेशन में चले जाएँ। जब से वन-डे क्रिकेट शुरू हुआ है, तब से कितने ही लोगों की जान मैच देखते हुए चली गई है। एक बार ऑस्ट्रेलिया से जब हमारा टेस्ट मैच टाई हुआ था तब खबर आई थी कि एक व्यक्ति टीवी देखते हुए ही चल बसा। तमाम न्यूज चैनलों में यदि सबसे हास्यास्पद "आज तक" है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। आमिर खान ने अपनी फिल्म "पीपली लाइव" में "आज तक" और उसके एक स्टार रिपोर्टर का ही मजाक उड़ाया है। मगर थोड़ा-सा मजाक उड़ा देने भर से ये ओछे लोग सुधरने वाले नहीं हैं। विश्व कप के दौरान दिल के मरीज, हाई ब्लड प्रेशर के मरीज इन चैनलों से जितना बच सकें उतना बेहतर।
लेखक के बारे में
दीपक असीम