युवा प्रतिभाओं को तराशना बड़ी जिम्मेदारी : अभय छजलानी

इंदौर। के अभय छजलानी ने कहा कि हमारी कोशिश यही है कि देश की युवा प्रतिभाओं को हम तराशें ताकि भारत को अच्छे खिलाड़ी मिल सकें।


उन्होंने कहा कि इसी कोशिश के तहत हमने विश्व टेबल टेनिस फेडरेशन के को में कोचिंग के लिए आमंत्रित किया है, जहां पर देश की 40 युवा प्रतिभाएं अपने खेल को निखार रही हैं।

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एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि स्वीडन को 4 बार विश्व टेबल टेनिस का टीम खिताब दिलवाने में अहम भूमिका अदा करने वाले कार्लसन की कोचिंग का लाभ निश्चित रूप से आने वाले समय में देखने को मिलेगा।
उन्होंने अभय प्रशाल के बारे में बताया कि यहां किसी जमाने में होलकर क्रिकेट का मैदान हुआ करता था। 1974-75 में तब प्रकाशचंद सेठी मुख्यमंत्री थे। जब क्रिकेट को अपना मैदान मिल गया, तब सेठीजी और उसके बाद की सरकार के प्रयासों से यह स्थान चार खेलों को आवंटित किया गया, जिसमें टेबल टेनिस एसोसिएशन भी शामिल था। पहले हमारे पास सीमित जगह हुआ करती थी लेकिन प्रशाल बनने से हम ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ी तैयार कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश टेबल टेनिस एसोसिएशन की 30 जिला इकाइयों में सैकड़ों बच्चे टेबल टेनिस के गुर सीख रहे हैं। देश में कहीं भी किसी भी प्रदेश में टेबल टेनिस की इतनी ‍गतिविधियां संचालित नहीं होतीं, जितनी कि मध्यप्रदेश में हो रही हैं। हम यही चाहते हैं कि मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य सभी राज्यों में टेबल टेनिस के पंख फैलें।

अभयजी ने बताया कि 1983 में अभय प्रशाल में राष्ट्रीय टेबल टेनिस चैंपियनशिप आयोजित की गई थी और तब से लेकर अब तक यहां कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की न केवल प्रतियोगिताएं हुई हैं बल्कि कई शिविरों के जरिए खिलाड़ियों को तराशा गया है।

उन्होंने कहा कि फिलहाल जो शिविर चल रहा है, उसका उद्देश्य यही है कि देश में हम टेबल टेनिस के खेल को आगे बढ़ा सकें। हम टेबल टेनिस ट्रस्ट के माध्यम से अभय प्रशाल में अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।
अभयजी के अनुसार यहां पर दूरदराज से जो खिलाड़ी आए हुए हैं, उन्हें रहने-खाने की अच्छी सुविधा मुहैया करवाई गई है। 18 टेबलों पर खिलाड़ियों को जब अभ्यास करते हुए आप देखेंगे तो खुद ही पता चल जाएगा कि कार्लसन की कोचिंग कैसा असर दिखला रही है।



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