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सिंहस्थ कुंभ में 'पान' खाना क्यों पाप माना गया है?

शुक्रवार,मई 13, 2016
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दक्षिणा हमेशा एक, पांच, ग्यारह, इक्कीस, इक्यावन, एक सौ एक, एक सौ इक्कीस, एक सौ इक्यावन जैसे सामर्थ्यानुसार होने चाहिए। दक्षिणा में कभी भी अंत में शून्य नहीं होना चाहिए। जैसे 50, 100, 500 आदि।
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सिंहस्थ में कुछ वस्तुओं के दान महादान की श्रेणी में आते हैं। अग्नि पुराण के अनुसार दस महादान ये हैं-सोना, अश्व (घोड़ा), तिल, हाथी, दासी, रथ, भूमि, घर, वधू और कपिला गाय। वैसे पुराणों में महादान की संख्या सोलह गिनाई गई है।
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पौराणिक मान्यता के अनुसार चारों युग के धार्मिक कृत्य प्रमुख रूप से अलग-अलग कहे गए हैं। सतयुग में तप, त्रेता में ज्ञान, द्वापर में यज्ञ और कलयुग में दान को प्रमुख बताया गया है। वैदिक ग्रंथों में दान की महिमा कही गई है। इस युग में गोदान, रथ, अश्व, ...
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सब तरह के कल्याण और सभी के उपकार के लिए गोदान उपयोगी है। उज्जैन में यह दान करना चाहिए। तीर्थस्थल उज्जैन को यह दान सबसे ज्यादा अच्छा लगता है। कहा गया है कि जो श्रेष्ठ विमान पर चढ़कर दिव्य अलंकारों से विभूषित होकर स्वर्ग जाना चाहे उसे गोदान करना
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ताम्बूल दान करने से मनुष्य पापों से छुटकारा पा जाता है, ताम्बूल खाने से पाप होता है। वह पाप ताम्बूल दान करने से नष्ट हो जाता है। पान का पत्ता, इसके आगे का हिस्सा, इसके नाड़ी तंतु, चूना और रात के समय कत्था खाने से पाप होता है और मनुष्य को दरिद्रता ...
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तीर्थ स्थल हरिद्वार में श्रद्धालु दक्षिणा के साथ वस्त्र से ढंक कर सोलह, तीन या एक फल का दान करते हैं। संकल्प में फल का नाम लेकर उसे विधि पूर्वक ब्राह्मणों को देना चाहिए। इस दान के लिए यह विचार करना कतई जरूरी नहीं है कि दान लेने वाला इसका अधिकारी है ...
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सिंहस्थ में गुप्त दान की बड़ी महिमा है। प्रकट रूप से जो दान किया जाता है, उसकी तुलना में गुप्त दान से दस गुना ज्यादा फल मिलता है। गुप्त दान बिना किसी कर्मकाण्ड के किया जा सकता है। सिंहस्थ में गुप्त दान की ऋषियों ने बहुत प्रशंसा की है।
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इसे आम बोलचाल की भाषा में तुलादान भी कहा जाता है। इसे महादान माना जाता है। हवन के बाद ब्राह्मण पौराणिक मंत्रों का उच्चारण करते हैं, वे लोकपालों का आवास करते हैं, दान करने वाला सोने का आभूषण-कंगन, अंगूठी, सोने की सिकड़ी वगैरह ब्राह्मण को दान देता है। ...
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भूमि-दान से अक्षय पुण्य मिलता है। महाभारत में कहा गया है- परिस्थितिवश व्यक्ति जो कुछ पाप कर बैठता है, वह गाय की चमड़ी के बराबर भूमिदान से खत्म हो जाता है। इस दान से अनेक श्रेष्ठ फल मिलते हैं।
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इस दान से भगवान विष्णु की निकटता हासिल होती है। अगर कोई श्रद्धालु मन में कोई खास कामना लेकर यह दान करता है, तो उसकी यह इच्छा पूरी होती है। अगर वह कामनाहीन होकर यह दान करता है, तो उसे विष्णु की कृपा हासिल होती है।
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सिंहस्थ में अन्नदान का बहुत महत्व है। इस अवसर पर थोड़ा दान करने से भी ज्यादा फल मिलता है। उज्जैन और सिंहस्थ में अन्नदान की विशेष महिमा है। अन्न से ही शरीर चलता है। अन्न ही जीवन का आधार है। अन्न प्राण है, इसलिए इसका दान प्राणदान के समान है। यह सभी ...
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तीर्थस्थली उज्जैन में कुछ अति धार्मिक श्रद्धालु किसी गरीब कन्या के विवाह के लिए नकद रुपया और उपकरणों का दान भी करते हैं। वे पहले से सूचना देकर ऐसे लोगों की जानकारी इकट्ठी कर लेते हैं, जो, धन की कमी से अपनी बेटी का ब्याह नहीं कर पाते।
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जानिए, दान के तीन रूप

शुक्रवार,फ़रवरी 5, 2016
दान के तीन रूप इस प्रकार हैं :- नित्य, नैमित्तिक और काम्य। जो दान हर रोज दिया जाता है, वह नित्य दान कहा जाता है। जो दान खास अवसर जैसे- ग्रहण वगैरह के समय में दिया जाता है, उसे नैमित्तिक कहा गया है। काम्य दान उसे कहते हैं, जिसे करने पर किसी कामना की ...
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सिंहस्थ में शय्यादान का बहुत महत्व है। यह दान हजारों वर्ष से चलन में है तीर्थस्थल के पुरोहित जिन चौरासी दान की चर्चा करते हैं, वे कमोबेश इसी शय्यादान के अंग है। इसमें आमतौर पर गृहस्थी में काम आने वाली चीजों का दान किया जाता है। इस सूची में ज्यादातर ...
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सिंहस्थ में माधव की प्रसन्नता के लिए, जाने-अनजाने पापों से छुटकारा पाने के लिए हर गृहस्थ को अपनी कमाई के अनुसार कुछ न कुछ दान अवश्य करना चाहिए। इसे किंचित् दान कहा गया है। इसका बहुत महत्व है। खासतौर से माघ महीने में यह दान करने से दानकर्ता सभी पापों ...
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हिन्दू धर्म में दान करने का अत्यधि‍क महत्व है। हमारे धर्मग्रंथों के अनुसार कई प्रकार के दान और उनका महत्व बताया गया है। नीचे बताए गए दान को महादान की संज्ञा दी गई है। जानिए यह कौन-कौन से दान हैं।
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कुछ वस्तुओं के दान महादान की श्रेणी में आते हैं। अग्नि पुराण के अनुसार दस महादान ये हैं-सोना, अश्व (घोड़ा), तिल, हाथी, दासी, रथ, भूमि, घर, वधू और कपिला गाय। वैसे पुराणों में महादान की संख्या सोलह गिनाई गई है। ये इस प्रकार हैं- तुला पुरुष, मनुष्य के ...
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