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गुरु हरकिशन जयंती : जानिए 10 तथ्य

Updated: सोमवार, 2 अगस्त 2021 (14:28 IST)
Guru Har Krishan Jyanati
 
 
- राजश्री कासलीवाल
 
1. सिखों धर्म के आठवें गुरु, गुरु हर किशन सिंह जी का जन्म श्रावण मास, कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को सन् 1656 ई. में कीरतपुर साहिब में हुआ था। 
 
2.गुरु हर किशन सिंह के पिता सिख धर्म के सातवें गुरु, गुरु हरि राय जी थे और उनकी माता का नाम किशन कौर था।
 
3. बचपन से ही गुरु हर किशन जी बहुत ही गंभीर और सहनशील प्रवृत्ति के थे। वे 5 वर्ष की उम्र में भी आध्यात्मिक साधना में लीन रहते थे। उनके पिता अकसर हर किशन जी के बड़े भाई राम राय और उनकी कठीन से कठीन परीक्षा लेते रहते थे। 
 
4. जब हर किशन जी गुरुबाणी पाठ कर रहे होते तो वे उन्हें सुई चुभाते, किंतु बाल हर किशन जी गुरुबाणी में ही रमे रहते।
 
5. उनके पिता गुरु हरि राय जी ने गुरु हर किशन को हर तरह से योग्य मानते हुए सन् 1661 में गुरुगद्दी सौंपी। उस समय उनकी आयु मात्र 5 वर्ष की थी। इसीलिए उन्हें बाल गुरु कहा गया है। 
 
6. गुरु हर किशन जी ने अपने जीवन काल में मात्र तीन वर्ष तक ही सिखों का नेतृत्व किया।
 
7. गुरु हर किशन जी ने बहुत ही कम समय में जनता के साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार करके लोकप्रियता हासिल की थी। 
 
8. ऊंच-नीच और जाति का भेदभाव मिटाकर उन्होंने सेवा का अभियान चलाया, लोग उनकी मानवता की इस सेवा से बहुत प्रभावित हुए और उन्हें बाला पीर कहकर पुकारने लगे।
 
9. नई दिल्ली में कई ऐतिहासिक गुरुद्वारे हैं। जिसमें गुरुद्वारा बंगला साहिब का महत्व अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की तरह है। कहा जाता है कि सिख धर्म के आठवें गुरु, गुरु हर किशन जी महाराज ने यहां विश्राम किया था। तब यह राजा जय सिंह का बंगला हुआ करता था। उस समय दिल्ली में चेचक की बीमारी फैली हुई थी। गुरु हर किशन महाराज ने सभी पीड़ितों का इलाज किया। जिसकी चपेट में आने से इनकी मृत्यु हो गई थी। 
 
10. सन् 1664 ई. में सिर्फ आठ वर्ष की उम्र में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष चौदस के दिन 'वाहेगुरु' शबद् का उच्चारण करते हुए ज्योति-जोत में समा गए। गुरु हर किशन जी का जीवन काल केवल आठ वर्ष का ही था।

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