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क्या है कृष्णा और मोरपंख का संबंध, जानिए रोचक कथा

मंगलवार,जून 22, 2021
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पौराणिक ग्रंथों के अनुसार श्रीजी राधारानी की 8 सखियां थीं। अष्टसखियों के नाम हैं- 1. ललिता, 2. विशाखा, 3. चित्रा, 4. इंदुलेखा, 5. चंपकलता, 6. रंगदेवी, 7. तुंगविद्या और 8. सुदेवी। राधारानी की इन आठ सखियों को ही "अष्टसखी" कहा जाता है। श्रीधाम वृंदावन ...
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पौंड्र नगरी का राजा पौंड्रक नकली श्रीकृष्ण बनकर खुद को वासुदेव कहता था। पौंड्रक को उसके मूर्ख और चापलूस मित्रों ने यह बताया कि असल में वही परमात्मा वासुदेव और वही विष्णु का अवतार है, मथुरा का राजा कृष्ण नहीं। कृष्ण तो ग्वाला है। बहुत समय तक ...
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प्याज को ग्रामीण क्षेत्रों में कांदा भी कहते हैं। अंग्रेजी में इसे ओन्यन या अन्यन (onion) कहते हैं। यह कंद श्रेणी में आता है जिसकी सब्जी भी बनती है और इसे सब्जी बनने में मसालों के साथ उपयोग भी किया जाता है। इसे संस्कृत में कृष्णावल कहते थे। हालांकि ...
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भगवान श्रीकृष्ण का रूप अनोखा है। करुपदेश का राजा पौंड्रक भी श्रीकृष्ण जैसे ही रूप रखकर खुद को वह विष्णु का अवतार मानता था। आओ जानते हैं श्रीकृष्ण के शुभ प्रतीकों के बारे में।
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भगवान श्रीकृष्ण के कई बाल सखा थे। जैसे मधुमंगल, सुबाहु, सुबल, भद्र, सुभद्र, मणिभद्र, भोज, तोककृष्ण, वरूथप, श्रीदामा, सुदामा, मधुकंड, विशाल, रसाल, मकरन्‍द, सदानन्द, चन्द्रहास, बकुल, शारद और बुद्धिप्रकाश आदि। उद्धव और अर्जुन बाद में सखा बने। बलराम ...
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भगवान श्रीकृष्ण के वैसे तो कई सखा अर्थात मित्र या दोस्त थे लेकिन बचपन में कुछ खास सखा थे। इन बाल सखाओं और सखियों के साथ श्रीकृष्ण ने अपना बचपन गुजारा था। लगभग 11 वर्ष की उम्र तक इन सखाओं के साथ रहे थे। कंस वध के लिए उन्हें गोकुल-वृंदावन को छोड़कर ...
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भगवान श्रीकृष्ण का रूप अनोखा है। वे अपने शरीर पर कई तरह की वस्तुएं धारण करते थे, जो कि शुभ प्रतीक होते हैं। हर वस्तुओं के धारण करके के पीछे कुछ ना कुछ कारण होता था, या उसे धारण करने के पीछे कोई ना कोई कथा जुड़ी हुई है।
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यह तो सभी जानते हैं कि भगवान श्रीकृष्‍ण का जन्म मथुरा में कंस के कारागार में हुआ। गोकुल और वृंदावन में उनका बचपन बिता और फिर किशोरावस्था में वे मुथरा में रहकर कंस वध के बाद जरासंध से युद्ध करते रहे। बाद में उन्होंने प्रभाष क्षेत्र में समुद्र के ...
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हल से खेतों में खेती जुताई की जाती है इसीलिए हल भारतीय कृषक समाज का प्रतीक है। इसकी सहायता से बीज बोने के पहले जमीन की आवश्यक तैयारी की जाती है। हल का प्रयोग प्राचीन काल से ही चला आ रहा है। राजा जनक और दशरथ के काल में भी हल के प्रयोग का उल्लेख मिलता ...
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ढोल मृदंग, झांझ, मंजीरा, ढप, नगाड़ा, पखावज और एकतारा में सबसे प्रिय बांस निर्मित बांसुरी भगवान श्रीकृष्ण को अतिप्रिय है। इसे वंसी, वेणु, वंशिका और मुरली भी कहते हैं। बांसुरी से निकलने वाला स्वर मन-मस्तिष्क को शांति प्रदान करता है। जिस घर में बांसुरी ...
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यह वह समय था जबकि देवी देवकी, देवी रोहिणी और देवी यशोदा के गर्भ में तीन महानतम शक्तियों का वास होता हैं। देवी देवकी के गर्भ में श्रीकृष्‍ण, यशोदा के गर्भ में योगमाया और देवी रोहिणी के गर्भ में बलराजी। आओ जानते हैं कि किस तरह बलरामजी देवी रोहिणी के ...
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श्रीमद्भागवत पुराण और महाभारत में अक्रूरजी का कई जगहों पर उल्लेख मिलता है। अक्रूरजी कौन थे? क्या है उनके जीवन की कथा? यह बात बहुत कम ही लोग जानते हैं। आओ जानते हैं अक्रूरजी के संबंध में रोचक जानकारी।
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भगवान श्रीकृष्‍ण ने राजा शूरसेन के पुत्र श्रीवसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से कंस की मथुरा के कारागार में भाद्रपद अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में रात 12 बजे के करीब जन्म लिया था। जन्म लेते ही उनके पिता वसुदेवजी उन्हें मथुरा की यमुना के पार गोकुल ...
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भगवान श्रीकृष्ण के कई मित्र थे। जैसे 1. मधुमंगल 2. सुबाहु 3. सुबल 4. भद्र 5. सुभद्र 6. मणिभद्र 7. भोज 8. तोककृष्ण 9. वरूथप 10. श्रीदामा 11. सुदामा 12. मधुकंड 13. अर्जुन 14. विशाल 15. रसाल 16. मकरन्‍द 17. सदानन्द 18. चन्द्रहास 19. बकुल 20. शारद 21. ...
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अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि अधिकतर विदेशी लोग श्रीकृष्‍ण के ही भक्त क्यों होते हैं श्रीराम भगवान या अन्य किसी भगवान के क्यों नहीं? यह सवाल बड़ा टेड़ा है लेकिन इसका उत्तर भी बहुत ही अजीब हो सकता है क्योंकि सही उत्तर को फॉरेनर ही बात सकते हैं। फिर ...
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कर्म और आचरण : कर्मों में कुशलता लाना सहज योग है। भगवान श्रीकृष्ण ने 20 आचरणों का वर्णन किया है जिसका पालन करके कोई भी मनुष्य जीवन में पूर्ण सुख और जीवन के बाद मोक्ष प्राप्त कर सकता है। 20 आचरणों को पढ़ने के लिए गीता पढ़ें। भाग्यवादी नहीं कर्मवादी ...
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पौराणिक ग्रंथों के अनुसार श्रीजी राधारानी की 8 सखियां थीं। अष्टसखियों के नाम हैं- 1. ललिता, 2. विशाखा, 3. चित्रा, 4. इंदुलेखा, 5. चंपकलता, 6. रंगदेवी, 7. तुंगविद्या और 8. सुदेवी। राधारानी की इन आठ सखियों को ही "अष्टसखी" कहा जाता है। श्रीधाम वृंदावन ...
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पौराणिक ग्रंथों के अनुसार श्रीजी राधारानी की 8 सखियां थीं। अष्टसखियों के नाम हैं- 1. ललिता, 2. विशाखा, 3. चित्रा, 4. इंदुलेखा, 5. चंपकलता, 6. रंगदेवी, 7. तुंगविद्या और 8. सुदेवी। राधारानी की इन आठ सखियों को ही "अष्टसखी" कहा जाता है। श्रीधाम वृंदावन ...
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पौराणिक ग्रंथों के अनुसार श्रीजी राधारानी की 8 सखियां थीं। अष्टसखियों के नाम हैं- 1. ललिता, 2. विशाखा, 3. चित्रा, 4. इंदुलेखा, 5. चंपकलता, 6. रंगदेवी, 7. तुंगविद्या और 8. सुदेवी। राधारानी की इन आठ सखियों को ही "अष्टसखी" कहा जाता है। श्रीधाम वृंदावन ...
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