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श्रीकृष्ण के गरीब सखा सुदामाजी की रोचक कहानी

सोमवार,मई 3, 2021
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अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि अधिकतर विदेशी लोग श्रीकृष्‍ण के ही भक्त क्यों होते हैं श्रीराम भगवान या अन्य किसी भगवान के क्यों नहीं? यह सवाल बड़ा टेड़ा है लेकिन इसका उत्तर भी बहुत ही अजीब हो सकता है क्योंकि सही उत्तर को फॉरेनर ही बात सकते हैं। फिर ...
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कर्म और आचरण : कर्मों में कुशलता लाना सहज योग है। भगवान श्रीकृष्ण ने 20 आचरणों का वर्णन किया है जिसका पालन करके कोई भी मनुष्य जीवन में पूर्ण सुख और जीवन के बाद मोक्ष प्राप्त कर सकता है। 20 आचरणों को पढ़ने के लिए गीता पढ़ें। भाग्यवादी नहीं कर्मवादी ...
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पौराणिक ग्रंथों के अनुसार श्रीजी राधारानी की 8 सखियां थीं। अष्टसखियों के नाम हैं- 1. ललिता, 2. विशाखा, 3. चित्रा, 4. इंदुलेखा, 5. चंपकलता, 6. रंगदेवी, 7. तुंगविद्या और 8. सुदेवी। राधारानी की इन आठ सखियों को ही "अष्टसखी" कहा जाता है। श्रीधाम वृंदावन ...
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पौराणिक ग्रंथों के अनुसार श्रीजी राधारानी की 8 सखियां थीं। अष्टसखियों के नाम हैं- 1. ललिता, 2. विशाखा, 3. चित्रा, 4. इंदुलेखा, 5. चंपकलता, 6. रंगदेवी, 7. तुंगविद्या और 8. सुदेवी। राधारानी की इन आठ सखियों को ही "अष्टसखी" कहा जाता है। श्रीधाम वृंदावन ...
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पौराणिक ग्रंथों के अनुसार श्रीजी राधारानी की 8 सखियां थीं। अष्टसखियों के नाम हैं- 1. ललिता, 2. विशाखा, 3. चित्रा, 4. इंदुलेखा, 5. चंपकलता, 6. रंगदेवी, 7. तुंगविद्या और 8. सुदेवी। राधारानी की इन आठ सखियों को ही "अष्टसखी" कहा जाता है। श्रीधाम वृंदावन ...
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कृष्ण के प्रपौत्र वज्र को बहुत सी जगह पर वज्रनाभ भी लिखा गया है। वज्रनाभ द्वारिका के यदुवंश के अंतिम शासक थे, जो यदुओं की आपसी लड़ाई में जीवित बच गए थे। द्वारिका के समुद्र में डूबने पर अर्जुन द्वारिका गए और वज्र तथा शेष बची यादव महिलाओं को ...
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वेदों का तत्व ज्ञान है उपनिषद और उपनिषदों का सार है गीता। भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन को जो ज्ञान दिया था वह गीता के नाम से प्रसिद्ध हुआ। गीता में जीवन की हर समस्याओं का समाधान है। गीता में हर तरह का ...
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भगवान श्रीकृष्‍ण के कारण हजारों लोगों ने ज्ञान प्राप्त किया था। ज्ञान प्राप्त करने का अर्थ है मोक्ष के मार्ग के दर्शन करना और उसी पर चल पड़ना। हालांकि ऐसे में कई लोग थे जो श्रीकृष्ण के पास होते हुए भी कुछ भी प्राप्त नहीं कर पाए क्योंकि श्रीकृष्ण और ...
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क्मिणी ने पूछा, 'और कर्ण? वो अपनी दानवीरता के लिए प्रसिद्ध था और कोई उसके द्वार से खाली हाथ नहीं गया। उसकी क्या गलती थी?'
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रामेश्वर कुण्ड, एक समय श्री कृष्ण इसी कुण्ड के उत्तरी तट पर गोपियों के साथ वृक्षों की छाया में बैठकर श्रीराधिका के साथ हास–परिहास कर रहे थे।
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कर्ण ने कृष्ण से पूछा - मेरा जन्म होते ही मेरी माँ ने मुझे त्याग दिया। क्या अवैध संतान होना मेरा दोष था ? द्रौपदी स्वयंवर में मेरा अपमान किया गया।
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श्रीकृष्ण के बचपन के कई मित्र थे जैसे मनसुखा, मधुमंगल, श्रीदामा, सुदामा, उद्धव, सुबाहु, सुबल, भद्र, सुभद्र, मणिभद्र, भोज, तोककृष्ण, वरूथप, मधुकंड, विशाल, रसाल, मकरन्‍द, सदानन्द, चन्द्रहास, बकुल, शारद, बुद्धिप्रकाश आदि। बचपन में यह सभी गोकुल और ...
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कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण के मुख से गीता को अर्जुन के अलावा संजय और भगवान शंकर ने सुनी थी। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का ज्ञान समय समय पर सभी को दिया है। विश्व में सर्वाधिक लेखन गीता के ज्ञान पर ही हुआ है। गीता पर विश्वभर में अनेकों व्याख्‍यान, ...
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महाभारत में कुरुक्षेत्र के युद्ध के दौरान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच जो संवाद हुआ था उसे भगवद्गीता कहा जाता है। श्रीकृष्ण ने गीता के माध्यम से वेद और उपनिषदों के ज्ञान को अनूठी शैली में सार रूप में प्रस्तुत किया था। इस ज्ञान को गीता ज्ञान भी कहा ...
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कहते हैं कि श्रीकृष्ण के तीसरे गुरु घोर अंगिरस थे। ऐसा कहा जाता है कि घोर अंगिरस ने देवकी पुत्र कृष्ण को जो उपदेश दिया था वही उपदेश श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में दिया था जो गीता के नाम से प्रसिद्ध हुआ। छांदोग्य उपनिषद में उल्लेख मिलता है कि ...
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महाभारत काल अर्थात द्वापर युग में हनुमानजी की उपस्थित और उनके पराक्रम का वर्णन मिलता है। हनुमानजी ने रामायण काल में भी कई बड़े बड़े महाबलियों का घमंड तोड़ दिया था। फिर चाहे वह रावण हो, मेघनाद हो या बाली। यहां तक की खुद लक्ष्मणजी भी महाबली हनुमानजी ...
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भगवान श्रीकृष्ण ने हर रिश्ता बड़ी ही ईमानदारी से निभाया और हर रिश्तों को उन्होंने महत्व दिया। आओ जानते हैं कि इस संबंध में कुछ खास जानकारी।
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ढोल मृदंग, झांझ, मंजीरा, ढप, नगाड़ा, पखावज और एकतारा में सबसे प्रिय बांस निर्मित बांसुरी भगवान श्रीकृष्ण को अतिप्रिय है। इसे वंसी, वेणु, वंशिका और मुरली भी कहते हैं। बांसुरी से निकलने वाला स्वर मन-मस्तिष्क को शांति प्रदान करता है। जिस घर में बांसुरी ...
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विद्या और कला में अंतर होता है। विद्या दो प्रकार की होती है अपरा और अपरा विद्या। इसी के अंतर्गत कई प्रकार की विद्याएं होती हैं। इसी तरह कलाएं भी दो प्रकार की होती है। पहली सांसारिक कलाएं और दूसरी आध्यात्मिक कलाएं। यहां हम आध्यात्मिक कलाओं के आधार पर ...
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