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पितृ दोष मिटाना है तो श्राद्ध पक्ष में दें पितरों को धूप, करें तर्पण

Updated: सोमवार, 1 अक्टूबर 2018 (17:12 IST)
पूर्वजों के कार्यों के फलस्वरूप आने वाली पीढ़ी पर पड़ने वाले अशुभ प्रभाव को पितृ दोष कहते हैं। पितृ दोष का अर्थ यह नहीं कि कोई पितृ अतृप्त होकर आपको कष्ट दे रहा है। पितृ दोष का अर्थ वंशानुगत, मानसिक और शारीरिक रोग और शोक भी होते हैं।
 
घर और बाहर जो वायु है वह सभी पितरों को धूप, दीप और तर्पण देने से शुद्ध और सकारात्मक प्रभाव देने वाली बन जाती है। इस धूप, श्राद्ध और तर्पण से पितृलोक के तृप्त होने से पितृ दोष मिटता है।
 
पितरों के तृप्त होने से पितर आपके जीवन के दुखों को मिटाने में सहयोग करते हैं। पितृ यज्ञ और पितृ दोष एक वैज्ञानिक धारणा है।
 
वेदानुसार यज्ञ 5 प्रकार के होते हैं - 
 
(1) ब्रह्म यज्ञ
(2) देव यज्ञ
(3) पितृ यज्ञ
(4) वैश्वदेव यज्ञ
(5) अतिथि यज्ञ। 
 
उक्त पांच यज्ञों को पुराणों और अन्य ग्रंथों में विस्तार से दिया गया है। उक्त पांच यज्ञ में से ही एक यज्ञ है पितृ यज्ञ। इसे पुराण में श्राद्ध कर्म की संज्ञा दी गई है। 
 
संकलन- अनिरुद्ध

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