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शरद पूर्णिमा के दिन खाएंगे इस तरह बनाई गई खीर तो होंगे 5 फायदे

Updated: मंगलवार, 19 अक्टूबर 2021 (11:37 IST)
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस बार यह पूर्णिमा 19 अक्टूबर 2021 मंगलवार को मनाई जाएगी। आओ जानते हैं कि शरद पूर्णिमा ( Sharad Purnima 2021 ) के दिन दूध या खीर खाने के क्या है फायदे।
 
 
शरद पूर्णिमा पर दूध या दूध से बनी खीर को बनाकर छत पर चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन आसमान से अमृतमयी किरणों का आगमन होता है जिसके कारण यह दूध या खीर अमृत समान बन जाता है। यह भी कहा जाता है कि इस दौरान चंद्र से जुड़ी हर वस्तु जागृत हो जाती है। दूध भी चंद्र से जुड़ा होने ने कारण अमृत समान बन जाता है जिसकी खीर बनाकर उसे चंद्रप्रकाश में रखा जाता है। बाद में दूध को पीने या खीर को खाने से कई तरह के लाभ मिलते हैं। आओ जानते हैं कि कौनसे 5 लाभ मिलते हैं।
 
कैसे बनाते हैं खीर : शाम को दूध में चावल मिलाकर उसमें सूखे मेवे आदि पौष्टिक चीजें डालकर उसे उबाला जाता है और फिर उसे ठंडा करके रात में चंद्रमा के प्रकाश में 1-2 घंटे रखने के बाद उसका सेवन किया जाता है।
 
1. चंद्रदोष होता है दूर : यह भी मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन दूध या खीर का प्रसाद वितरण करने से जहां चंद्रदोष दूर हो जाता है।
 
2. लक्ष्मी की होती है प्राप्ति : माता लक्ष्मी को खीर का भोग लगाकर सार्वजनिक रूप से खीर प्रसादी का वितरण करने से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
Kheer Recipe
3. रोग नष्ट करने की क्षमता : अमृत किरणों में कई तरह के रोग नष्ट करने की क्षमता होती है। ऐसे में जहां इन किरणों से बाहरी शरीर को लाभ मिलता है वहीं शरीर के भीतर के अंगों को भी लाभ मिलता है।
 
4. बढ़ती है शारीरिक शक्ति : शरद पूर्णिमा से मौसम में परिवर्तन की शुरूआत होती है। इस तिथि के बाद से वातावरण में ठंडक बढ़ने लगती है। शीत ऋतु का आगमन होता है। शरद पूर्णिमा की रात में खीर का सेवन करना इस बात का प्रतीक है कि शीत ऋतु में हमें गर्म पदार्थों का सेवन करना चाहिए, क्योंकि इन्हीं चीजों से ठंड में शक्ति मिलती है।
 
5. बढ़ती है रोगप्रतिरोधक क्षमता : खीर में दूध, चावल, सूखे मेवे आदि पौष्टिक चीजें डाली डाती हैं, जो कि शरीर के लिए फायदेमंद होती हैं। इन चीजों की वजह से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। अच्छा स्वास्थ्य मिलता है। यहीं खीर जब पूर्णिमा को बनाकर खाई जाए तो उसका गुण दोगुना हो जाता है।
 

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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