शनि ग्रह के बारे में रोचक जानकारी, क्या कहता है विज्ञान

shani and guru vakri
अनिरुद्ध जोशी| पुनः संशोधित गुरुवार, 21 मई 2020 (18:05 IST)
के संबंध में ज्योतिष और दोनों की अलग अलग धारणाएं हैं। आओ जानते हैं कि खगोल विज्ञान क्या कहता है इस संबंध में संक्षिप्त जानकारी।
खगोल विज्ञान अनुसार शनि ग्रह आकार में बृहस्पति के बाद दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है। आकाश में यह पीले तारे के समान दिखाई देता है। इसका गुरुत्व पानी से भी कम है। शनि ग्रह के लगभग 82 उपग्रह है। अर्थात चंद्रमा की तरह उसके 82 चंद्रमा है। शनि का सबसे बड़ा उपग्रह टाईटन है। यह आकार में बुध ग्रह के बराबर है। इसके अलावा फोबे, यूरोपा आदि उपग्रह है। फोबो विपरीत दिशा में परिक्रमा करता है।

शनि ग्रह के चारों ओर जो वलय है वह दूर से नीला नजर आता है। वैज्ञानिक इस वलय को लेकर अभी भी अचंभित हैं कि आखिर ये वलय किस ‍चीज के बने हैं। कहते हैं कि इसके चारों ओर छोटे छोटे कणों से मिलकर यह वलय बना होगा। वैज्ञानिक कहते हैं कि इसके वायुमंडल में गैसीय संरचना है जिसमें हाईड्रोजन व हीलियम गैस पाई जाती है। शनि के चारों ओर 12 वलय हैं और 2 रिक्त स्थान।
खगोल विज्ञान के अनुसार शनि का व्यास पृथ्वी के व्यास से 9 गुना ज्यादा है जबकि घनत्व 8 गुना कम है। 120.536 किलोमीटर का इसका भूमध्य रेखीय व्यास है। अपनी धुरी पर घूमने में यह ग्रह 10 घंटे 34 मिनट लगाता है। कहते हैं कि शनि में लगभग 763 धरतियां समा सकती हैं। इसका एक वर्ष धरती के 29.45 साल बराबर का होता है।

10 किमी प्रति सेकंड की औसत गति से यह सूर्य से औसतन डेढ़ अरब किमी (142 करोड़, 66 लाख, 66 हजार 422 किलोमीटर) की दूरी पर रहकर यह ग्रह 29 वर्षों में सूर्य का चक्कर पूरा करता है। गुरु शक्ति पृथ्‍वी से 95 गुना अधिक और आकार में बृहस्पति के बाद इसी का नंबर आता है। शनि धरातल का तापमान 240 फेरनहाइट है या 139 डीग्री सेल्सीयस है।



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