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Written By WD Feature Desk
Last Modified: गुरुवार, 5 मार्च 2026 (16:47 IST)

भारत-पाकिस्तान तनाव पर ग्रह गोचर का संकेत, क्या पीओके को लेकर बदल सकती है स्थिति?

india pakistan war operation sindoor: The picture shows Indian soldiers facing each other, with flags and flags in the background.
India pakistan war: वर्ष 2025 में हमने देखा कि किस तरह भारत पाकिस्तान युद्ध, ईरान इजराइल युद्ध, यूक्रेन और रशिया युद्ध हुआ और आतंकवादी हमला, विमान दुर्घटना, 7.5 की तिव्रत का भूकंप, बांग्लादेश एवं नेपाल में सत्ता परिवर्तन और तमाम ऐसी घटनाएं देखी जिसके बारे में किसी ने कभी सोचा भी नहीं था। 
 

वर्ष 2025 के ग्रहण गोचर:

वर्ष 2025 में हमने खतरनाक ग्रह गोचर और योग देखें। एक ओर जहां शनि ने 29 मार्च 2025 में मीन राशि में गोचर किया वहीं 14 मई को बृहस्पति ने मिथुन में, 18 मई को राहु ने कुंभ में और केतु ने सिंह में गोचर किया। इस बीच सूर्य और चंद्र ग्रहण योग भी बनें। इसी ग्रहण और ग्रोचर के चलते खप्पर योग, पिशाच योग, षडाष्टक योग, अंगारक योग और तमाम तरह के बुरे योगों का निर्माण हुआ। 

वर्ष 2026 के ग्रह गोचर:

वर्तमान में शनि मीन योग बना हुआ है। बृहस्प‍ित का मिथुन में अतिचारी गोचर 2 जून तक रहेगा, फिर कर्क में यह गोचर होगा और फिर 30 अक्टूबर को सिंह में यह गोचर होगा। इसी प्रकार से राहु कुंभ में और केतु सिंह में अक्टूबर 2026 तब बनें रहेंगे। इस बीच मंगल का गोचर शनि और राहु के साथ मिलकर विपरीत परिस्थिति निर्मित करेगा। इस बीच 19 मार्च 2026 से रौद्र नाम का संवत्सवर भी प्रारंभ होगा जो देश और दुनिया के लिए बहुत बुरा माना जा रहा है। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि जल्द ही फिर से शुरू होगा भारत और पाकिस्तान का युद्ध के हालात बन सकते हैं। इसके अर्थ है कि ऑपरेशिन सिंदूर 2.0 फिर से शुरु हो सकता है और इस बार POK के भारत में विलय की पूरी संभावना बन रही है। 
 

भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की संभावनाओं वाला समय

सूर्य और चंद्र ग्रहण और युद्ध:

सूर्य और चंद्र ग्रहण के दौरान अक्सर भूकंप, आगजनी और विस्फोट की घटनाएं देखी गई है। वर्तमान में 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण और फिर 03 मार्च चंद्र ग्रहण के बीच में दुनिया महायुद्ध के मुहाने पर पहुंच गई है। इसी बीच में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के साथ ही ईरान और इजराइल का भयंकर युद्ध प्रारंभ हुआ है। अब अगला सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को होगा और 28 अगस्त 2026 को चंद्र ग्रहण रहेगा। इसका अर्थ है कि इस दौरान फिर से किसी मोर्चे पर जंग का आगाज हो सकता है। 

अतिचारी बृहस्पति: 

अतिचारी गुरु: पिछले कुछ वर्ष पहले यानी 2018 से लेकर 2022 तक बृहस्पति 4 राशियों में अतिचारी थे। इन वर्षों में जो हुआ वह सभी ने देखा है। वर्ष 2019 से ही देश और दुनिया में तेजी से बदलाव हुआ है। कोरोना महामारी के बाद तो दुनिया पूरी तरह से बदल गई है। वर्ष 2025 में बदलाव का दूसरा चरण प्रारंभ हुआ जब 14 मई को बृहस्प‍ित का मिथुन में गोचर हुआ तो भारत पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर था। बृहस्पति का मिथुन राशि में अतिचारी गोचर चल रहा है, जो 8 वर्षों तक चलेगा।
  • बृहस्पति 02 जून 2026 तक मिथुन राशि में रहेंगे, जिसके बाद वे तेज़ी से कर्क राशि में चले जाएंगे।
  • कर्क में बृहस्पति उच्च के हो जाते हैं, जिससे वे अच्छा फल मिलेगे लेकिन अतिचारी गुरु क्या फल देंगे यह कोई नहीं कह सकता।
  • ऐसी आशंका है कि तब भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से तनाव बढ़ सकता है।

शनि मीन योग:

जैसा कि पहले ही आशंका जताई गई थी कि 29 मार्च 2025 को जब शनि मीन राशि में प्रवेश करेंगे, तो दुनिया भर में विद्रोह, युद्ध और प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ जाएंगी। यह आशंका सच साबित हुई। शनिदेव इस राशि में 3 जून 2027 तक रहकर लोगों के कर्मों का फल निर्धारित करते रहेंगे। 03 जून को शनि जब मेष गोचर करेंगे तब यह समय युद्ध के लिहाज से और भी ज्यादा खतरनाक रहेगा। वक्री होकर वे 20 अक्टूबरत तक पुन: मीन में लौट आएंगे। इस दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से कभी भी युद्ध शुरू हो सकता है। ज्योतिषियों का आकलन है कि जब शनि अपनी शत्रु राशि मेष में प्रवेश करेगा तब दुनिया के हालात और भी बुरे हो जाएंगे।
 

मंगल का गोचर:

मंगल का शनि या राहु के साथ संयोग युद्ध, भूकंप, आग या विस्फोट को जन्म देता है। मंगल का जब जब शनि या राहु के साथ षडाष्टक या अंगारक योग बना है तब तक युद्ध हुआ है। वर्ष 2025 में मंगल का शनि और राहु के साथ कई बार योग संयोग बना था। इस वर्ष 6 जनवरी 2026 में मंगल ने मकर राशि में गोचर करके देश और दुनिया में तनाव को बढ़ाया और जब 23 फरवरी को मंगल ने कुंभ में गोचर किया तब राहु के साथ अंगारक योग बनाकर पाकिस्तान और अफगानिस्तान सहित ईरान और इजराइल में युद्ध की आग भड़का दी। यह अंगारक योग 02 अप्रैल तक रहेगा। 
 
ऐसा संभावित है कि आने वाले समय में मंगल कुंभ, मीन, मेष, मिथुन, कर्क और सिंह में गोचर करेंगे। मंगल के कारण वर्ष 2026 में भारत एक बड़े युद्ध में जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो 28 दिसंबर 2027 तक यह युद्ध चल सकता है। वर्ष 2026 में एक ओर जहां सीमाओं पर संघर्ष बढ़ेगा वहीं प्रकृतिक आपदा, भूकंप और खद्यान संकट से दुनिया परेशान रहेगी।  
 

ग्रह गोचर और ग्रहण की खतरनाक स्थिति:

ग्रह गोच और ग्रहण की स्थिति 12 जुलाई से 15 अगस्त के बीच का समय भयंकर रहने वाला है जबकि गुरु, चंद्र और सूर्य यानी यह तीनों ग्रह कर्क राशि में होंगे। यानी 15 से 12 अगस्त के बीच यह इसी राशि में रहेंगे। इस युति के बाद भारत के लिहाज से स्थितियों में सुधार होगा लेकिन विनाश के बाद। 
गुरु, चंद्र और सुर्य तीनों ग्रहों का पुष्य नक्षत्र में जा रहे हैं जोकि शनि का नक्षत्र है। यह शनि का नक्षत्र है। शनि और पुष्य दोनों ही न्याय के ग्रह नक्षत्र हैं जो तीनों ग्रहों के साथ जुडकर अलग-अलग कहानी लिखने का काम करेंगे। सूर्य के साथ आग और चंद्र के साथ जल प्रलय की उत्पत्ति करेंगे। यह विध्वंस के बाद सृजन की नींव भी रखेंगे। यह मीन राशि का शनि जुलाई और अगस्त 2026 के माह में अपनी पूर्ण विनाश लीला का सृजन कर सकता है। ऐसा ग्रह योग संकेत देते हैं। 
 

रौद्र संवतसर भी बनेगा युद्ध का बड़ा कारण: 

वर्तमान में विक्रम संवत 2082 के अंतर्गत कालयुक्त सिद्धार्थ संवत्सर चल रहा है। इस संवत्सर के फलानुसार भारत में और दुनिया में युद्ध और आतंकवाद की घटनाओं के दर्शन होंगे, जो एक बड़े युद्ध की भूमिका तय करेंगे। सिद्धार्थ संवत्सर के बाद विक्रम संवत 2083 जब प्रारंभ होगा तब शुरू होगा रौद्र नाम संवत्सर प्रारंभ होगा। 19 मार्च 2026 से रौद्र नाम संवत्सर प्रारंभ होगा। यानी विक्रम संवत 2083 से प्रारंभ होगा रौद्र संवत्सर। यह देश और दुनिया में भयंकर उथल-पुथल लेकर आएगा। मध्य एशिया में नरसंहार जारी है और अब यह दक्षिण एशिया में भी देखा जाएगा। 
 

भारत की कुंडली क्या कहती है?

भारत की कुंडली में इस वक्त मंगल मंगल की महादशा शुरू हुई है, जिसमें मंगल की ही अंतर्दशा 12 सितंबर 2025 से 9 फरवरी 2026 तक रहेगी। यदि इस दौरान पाकिस्तान कुछ बड़ी गलती करता है तो भारत का पराक्रम दुनिया देखेगी। भयानक युद्ध होने की संभावना प्रबल है जो पाकिस्तान के वजूद को खतरे में डाल देगा। भारत को इस बार कोई शक्ति रोक नहीं पाएगी क्योंकि मंगल देश के प्रमुख की कुंडली में भी मजबूत स्थिति में गोचर कर रहा है और यह संभावना प्रबल है कि वर्ष 2027 के अंत तक पीओके के भारत में शामिल हो जाएगा।
 

भारत सरकार का स्टैंड दशकों से स्पष्ट और अडिग रहा है: "POK भारत का अभिन्न अंग है।"

संसदीय संकल्प (1994): भारत की संसद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था कि पाकिस्तान को अपने अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों को खाली करना होगा। पिछले कुछ समय में रक्षा मंत्री और गृह मंत्री ने बार-बार दोहराया है कि POK को वापस लेना अब भारत के एजेंडे में प्रमुखता से है। हालांकि, इसे 'युद्ध' के बजाय 'रणनीतिक और कूटनीतिक' तरीके से हासिल करने पर जोर दिया जाता रहा है। वर्तमान में पाकिस्तान अपने इतिहास के सबसे बुरे आर्थिक, सैन्य और राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। ऐसे में वह युद्ध लड़ने लायक नहीं है। यदि वह यह गलती करता है तो उसे कोई नहीं बचा पाएगा। क्योंकि सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के बाद भारत ने अपनी रक्षा नीति को 'प्रो-एक्टिव' (Pro-active) बना लिया है।
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