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नृसिंह जयंती, जानिए श्री हरि विष्णु के इस अवतार की 10 रोचक बातें

शुक्रवार,मई 13, 2022
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भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी (12वें दिन) के दिन भुवनेश्वरी देवी की जयंती मनाई जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 2021 में ये 18 सितम्बर को मनाई जाएगी। आओ जानते हैं माता भुवनेश्वरी के संबंध में 10 अनजाने रहस्य।
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भगवान गणेशजी को भारतीय धर्म और संस्कृति में प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। उनकी पूजा के बगैर कोई भी मंगल कार्य शुरू नहीं होता। सभी मांगलिक कार्य में पहले गणेश जी की स्थापना और स्तुति की जाती है। आओ जानते हैं भगवान गणेशजी के संबंध में संपूर्ण परिचय।
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ऐसे कई देवी और देवता हैं जिनके अष्ट कुल या अष्टावतार या अष्ट अवतार या स्वरूप हैं। आओ जानते हैं उनके नाम।
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शीतलाष्टमी देशभर में अलग-अलग जगह पर शुक्ल और कृष्ण पक्ष की तिथियों पर मनाया जाता है। इस पर्व को बसोरा भी कहते हैं। बसोरा का अर्थ है बासी भोजन। शीतला माता की पूजा के दिन घर में चूल्हा नहीं जलता है। इसीलिए बाजी भोजन करने की परंपरा है। आओ जानते हैं ...
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भगवान श्रीविष्णु के 24 से अधिक अवतार लिए हैं। हालांकि 24 और 10 अवतारों की अधिक चर्चा होती है। इन 24 में से ही एक है हंसावतार या हंस अवतार। आओ जानते हैं कि इस अवतार की क्या है 10 रोचक बातें
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भगवान महेश को ही महेश्वर कहा जाता है। यह त्रिदेवों में से एक है। आओ जानते हैं कि भगवान महेश का रहस्य क्या है।
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हिन्दू धर्म में प्रकृति का बहुत महत्व बताया गया है। हिन्दू धर्म के सभी त्योहार प्रकृति से ही जुड़े हुए हैं। प्रकृति से हमें फल, फूल, सब्जी, कंद-मूल, औषधियां, जड़ी-बूटी, मसाले, अनाज, जल आदि सभी प्राप्त होते ही हैं। इसलिए भी इसका संवरक्षण करना जरूरी ...
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माता कालिका के अनेक रूप हैं जिनमें से प्रमुख है- 1.दक्षिणा काली, 2.शमशान काली, 3.मातृ काली और 4.महाकाली। इसके अलावा श्यामा काली, गुह्य काली, अष्ट काली और भद्रकाली आदि अनेक रूप भी है। सभी रूपों की अलग अलग पूजा और उपासना पद्धतियां हैं। आओ जानते हैं ...
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लक्ष्मीजी 8 अवतार बताए गए हैं:- महालक्ष्मी, जो वैकुंठ में निवास करती हैं। स्वर्गलक्ष्मी, जो स्वर्ग में निवास करती हैं। राधाजी, जो गोलोक में निवास करती हैं। दक्षिणा, जो यज्ञ में निवास करती हैं। गृहलक्ष्मी, जो गृह में निवास करती हैं। शोभा, जो हर वस्तु ...
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देवकुल में मुख्‍यत: 33 देवताओं का समूह हैं। इन 33 देवताओं के अलावा मरुद्गणों और यक्षों आदि को देव गणों के समूह में शामिल किया गया है। त्रिदेवों ने सभी देवताओं को अलग-अलग कार्य पर नियुक्त किया है। वर्तमान मन्वन्तर में ब्रह्मा के पौत्र कश्यप से ही ...
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अक्सर मन में यह विचार आता है कि सूर्य ग्रह है या देवता। देवता है तो ग्रह कैसे हो सकता है? आओ जानते हैं कि सूर्य देव कौन हैं और कैसे हैं।
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क्या ईश्वर को नहीं मानने वाले दुख पाते हैं और मानने वाले सुख पाते हैं? नहीं, दरअसल ईश्वर को मानने वाले कई लोग पापी हैं और नहीं मानने वाले कई लोग पुण्यात्माएं हैं। तब ऐसे में ईश्वर किसकी ओर रहेगा?
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ॐ नम: शिवाय। माता सती और पार्वती के पति भगवान शंकर कब हुए थे। कितने हजार वर्ष पूर्व हुए थे और क्या है उनके पौराणिक एवं पुरातात्विक प्रमाण? आओ जानते हैं इस संबंध में कुछ खास।
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दूसरे धर्मों में उल्लेख मिलता है कि ईश्वर एक ही है। उसका एक पुत्र है। उसने सृष्टि की रचना की। वह सातवें आसमान पर रहता है। वह सभी का न्यायकर्ता है। वह फैसला करेगा। वह पापियों को दंड और पुण्य लोगों को स्वर्ग देगा। ऐसी कई बाते हैं जो ईश्वर को ...
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देवियों में त्रिदेवी, नवदुर्गा, दशमहाविद्या और चौसठ योगिनियों का समूह है। हिन्दू धर्म में सैंकड़ों देवियां हैं। उनमें से कुछ प्रजापतियों की पुत्रियां हैं, तो कुछ स्यंभू हैं और कुछ अन्य किसी देवता की पत्नियां हैं। अधिकतर देवियों को भगवान शंकर की ...
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भारत में कई समाज या जाति के कुलदेवी और देवता होते हैं। इसके अलावा पितृदेव भी होते हैं। भारतीय लोग हजारों वर्षों से अपने कुलदेवी और देवता की पूजा करते आ रहे हैं। कुलदेवी और देवता को पूजने के पीछे एक गहरा रहस्य है, जो बहुत कम लोग जानते होंगे। आओ जानते ...
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ब्रह्म ही सत्य है। 'एकं एवं अद्वि‍तीय' अर्थात वह एक है और दूसरे की साझेदारी के बिना है- यह 'ब्रह्मसूत्र' कहता है। वेद, उपनिषद और गीता ब्रह्मसूत्र पर कायम है। ब्रह्मसूत्र का अर्थ वेद का अकाट्‍य वाक्य, ब्रह्म वाक्य। ब्रह्मा को आजकल ईश्वर, परमेश्वर या ...
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हिन्दू पुराणों में भगवान शिव के ‍जीवन का जो चित्रण मिलता है वह बहुत ही विरोधाभासिक और न समझ में आने वाला लगता है, लेकिन शोधार्थियों के लिए यह मुश्किल काम नहीं है। हालांकि समाज के मन में उनके नाम, जीवन और अन्य बातों को लेकर कोई स्पष्ट तस्वीर नजर नहीं ...
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हालांकि ईश्वर तो गुणातीत और गुणरहित है फिर भी लिखने में ऐसा ही आता है कि ईश्वर है तो उसके क्या गुण है? यहां प्रस्तुत है इसके बारे में संक्षिप्त जानकारी।
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प्राचीन काल से ही भारत में साधु और संतों के प्रति बहुत आदर और सम्मान रहा है। एक ओर जहां भारत में देवी, देवताओं और भगवानों के मंदिर बने तो दूसरी और सिद्ध ऋषि और मुनियों के समाधि स्थल भी बने।
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हिन्दू धर्म के ग्रंथ वेद में ईश्वर को 'ब्रह्म' कहा गया है। ब्रह्म को प्रणव, सच्चिदानंद, परब्रह्म, ईश्वर, परमेश्वर और परमात्मा भी कहा जाता है। इसी कारण हिन्दू धर्म को 'ब्रह्मवादी' धर्म भी कहा जाता है। इस ब्रह्म के बारे में उपनिषद (वेदांत) और गीता में ...
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हिन्दू धर्म के प्रमुख 33 देवताओं की लिस्ट में अश्विनी कुमारों का नाम भी है। अश्विनी देव से उत्पन्न होने के कारण इनका नाम अश्‍विनी कुमार रखा गया। इन्हें सूर्य का औरस पुत्र भी कहा जाता है। ये मूल रूप से चिकित्सक थे। ये कुल दो हैं। एक का नाम 'नासत्य' ...
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ऐसी मान्यता है कि हिन्दू देवी-देवताओं की संख्या 33 या 36 करोड़ है, लेकिन ये सच नहीं है। वेदों में देवताओं की संख्या 33 कोट‍ि बताई गई है। कोटि का अर्थ प्रकार होता है जिसे लोगों ने या बताने वाले तथाकथित पंडितों ने 33 करोड़ कर दिया। यह भ्रम आज तक जारी ...
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जैसे जैन कैवल्य ज्ञान को प्राप्त व्यक्ति को तीर्थंकर या अरिहंत कहते हैं। बौद्ध संबुद्ध कहते हैं वैसे ही हिंदू भगवान कहते हैं। भगवान का अर्थ है जितेंद्रिय। इंद्रियों को जीतने वाला। भगवान का अर्थ ईश्वर नहीं और जितने भी भगवान हैं वे ईश्वर कतई नहीं है। ...
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ईश्वर न तो भगवान है, न देवता, न दानव और न ही प्रकृति या उसकी अन्य कोई शक्ति। ‍ईश्वर एक ही है अलग-अलग नहीं। ईश्वर अजन्मा है। जिन्होंने जन्म लिया है और जो मृत्यु को प्राप्त हो गए हैं या फिर अजर-अमर हो गए हैं वे सभी ईश्वर नहीं हैं। जो वेदज्ञ हैं, गीता ...
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हिंदू धर्म ईश्वर को कर्ता-धर्ता नहीं मानता। वह तो एक 'शुद्ध प्रकाश' है। उसकी उपस्थिति से ही ब्रह्मांड निर्मित होते हैं और भस्म भी हो जाते हैं। जब कुछ नहीं था तब भी वही था और अब सब कुछ है तो तब भी वही है और प्रलयकाल में जब फिर से कुछ नहीं होगा तब भी ...
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ईश्वर की प्रार्थना की शक्ति के महत्व को सभी धर्मों के अलावा विज्ञान ने भी स्वीकार किया है, लेकिन हिंदू प्रार्थना को छोड़कर सब कुछ करता है। जैसे- पूजा, आरती, भजन, कीर्तन, यज्ञ आदि। आप तर्क दे सकते हैं कि यह सभी ईश्वर प्रार्थना के रूप ही तो हैं, लेकिन ...
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गुनहगार है हिन्दू...?

गुरुवार,सितम्बर 6, 2012
हिन्दू आम तौर पर एकेश्वरवादी नहीं होते। वह ईश्वर को छोड़कर तरह-तरह के देवी, देवता, नाग, झाड़, पितर और गुरुओं की पूजा करते रहते हैं, जबकि वेद स्पष्ट तौर पर इसके खिलाफ हैं। वेद की कई ऋचाओं में एकेश्वरवाद की घोषणा की गई है। वेद के अंतिम भाग को वेदांत ...
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धार्मिक आजादी का सभी धर्मों में दुरुपयोग हुआ है। इसका यह मतलब नहीं की लोगों की आजादी छीन ली जाए। धार्मिक आजादी के चलते जहां संतों ने धर्म की मनमानी व्याखाएं की और उसका अपने हित में उपयोग किया, वहीं बहुत से संतों ने अपना एक अलग ही पंथ गढ़ लिया है।
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वेदों के अनुसार ब्रह्म (ईश्‍वर) ही सत्य है। परमेश्वर से इस ब्रह्मांड की रचना हुई। इस ब्रह्मांड में सकारात्मक और नकारात्मक शक्तियां रहती हैं। वैदिक ऋषि उस परमेश्वर सहित सकारात्मक शक्तियों की प्रार्थना गाते थे और उनसे ही सब कुछ मांगते थे। उनकी ...
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ऐसी मान्यता है कि हिंदू देवी-देवताओं की संख्या 33 या 36 करोंड़ है। ऐसी मान्यता किस आधार पर है यह तो नहीं मालूम, लेकिन वेद और पुराण में इतने करोड़ देवी-देवताओं के नामों का कोई उल्लेख नहीं मिलता है।
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अर्थात हम जिस भी मूर्त या मृत रूप की पूजा, आरती, प्रार्थना या ध्यान कर रहे हैं वह ईश्‍वर नहीं है, ईश्वर का स्वरूप भी नहीं है। जो भी हम देख रहे हैं- जैसे मनुष्‍य, पशु, पक्षी, वृक्ष, नदी, पहाड़, पत्थर, आकाश आदि। फिर जो भी हम सुन रहे हैं- जैसे कोई ...
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