हिन्दू धर्म की 9 महत्वपूर्ण परिक्रमाएं

अनिरुद्ध जोशी|
क्षिप्रा परिक्रमा : ‍तीर्थ नगरी उज्जैन से क्षिप्रा नदी की परिक्रमा शुरु होती है। दत्तअखाड़ा घाट से कई साधु-संतों के साथ आम जनता इस यात्रा को शुरु करते हैं। यह यात्रा लगभग 545 किमी की है। हर दिन करीब 20 किमी की यात्रा होती है। पदयात्रा के दौरान शिप्रा और तीर्थ स्थलों के दर्शन होते हैं। यात्रा का समापन उज्जैन स्थित क्षिप्रा नदी के रामघाट पर पहुंचकर होता है। उज्जैन में चौरासी महादेव की परिक्रमा का भी विधान है।
पंचकोशी यात्रा : पूर्णिमा से वैशाख मास प्रारंभ हो गया है। वैशाख मास का महत्व कार्तिक और माघ माह के समान है। इस मास में जल दान, कुंभ दान का विशेष महत्व है। वैशाख मास स्नान का महत्व अवंति खंड में है। जो लोग पूरे वैशाख स्नान का लाभ नहीं ले पाते हैं, वे अंतिम पांच दिनों में पूरे मास का पुण्य अर्जित कर सकते हैं। वैशाख मास एक पर्व के समान है, इसके महत्व के चलते उज्जैन में सिंहस्थ भी इसी मास में आयोजित होता है। पंचकोशी यात्रा में सभी ज्ञात-अज्ञात देवताओं की प्रदक्षिणा का पुण्य इस पवित्र मास में मिलता है।
 
पंचकोशी यात्रा उज्जैन की प्रसिद्ध यात्रा है। इस यात्रा में आने वाले देव- 1. पिंगलेश्वर, 2 कायावरोहणेश्वर, 3. विल्वेश्वर, 4. दुर्धरेश्वर, 5. नीलकंठेश्वर हैं। शाख मास तथा ग्रीष्म ऋतु के आरंभ होते ही शिवालयों में गलंतिका बंधन होता है। इस समय पंचेशानी यात्रा (पंचक्रोशी यात्रा) शुरू होती है। उज्जैन की नागनाथ की गली पटनी बाजार स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर से जल लेकर यात्री 118 किलोमीटर की पंचक्रोशी यात्रा करते हैं।
 
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