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पर्यावरण दिवस पर जानिए 5 तत्वों की महत्ता

गुरुवार,जून 4, 2020
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जगतगुरु स्वामी रामानंदाचार्य के बारह शिष्यों में से एक संत कबीर सभी से अलग थे। उन्होंने गुरु से दीक्षा लेकर अपना मार्ग अलग ही बनाया और संतों में वे शिरोमणि हो गए। कुछ लोग कबीर को गोरखनाथ की परम्परा का मानते हैं, जबकि उनके गुरु रामानंद वैष्णव धारा से ...
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माता गायत्री को वेदमाता भी कहा जाता है। उनके हाथों में चारों वेद सुरक्षित हैं और उन्हीं के नाम पर गायत्री मंत्र की रचना हुई है। वे ही गायत्री मंत्र की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनके बारे में पुराणों में अलंकारिक कथाओं का वर्णन मिलता है। लेकिन कई कथाओं ...
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दस महा विद्या 1.काली, 2.तारा, 3.त्रिपुरसुंदरी, 4.भुवनेश्वरी, 5.छिन्नमस्ता, 6.त्रिपुरभैरवी, 7.धूमावती, 8.बगलामुखी, 9.मातंगी और 10.कमला। इनमें से माता की सातवीं शक्ति हैं धूमावती।
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अंतरिक्ष में उत्तर की दिशा में एक तारा है जिसका नाम ध्रुव है। इस तारे का नाम उसी ध्रुव पर रखा गया है जो भगवान विष्णु का परमभक्त था। आओ जानते हैं ध्रुव की कथा।
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भारत में मां विंध्यवासिनी की पूजा और साधना का प्रचलन है। देवी विंध्यवासिनी माता कौन थीं? कहां है उनका मुख्य शक्तिपीठ और क्या है उनका रहस्य जानिए महत्वपूर्ण 6 रहस्य।
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स्वायंभुव 'मनु' को आदि भी कहा जाता है। 'आदि' का अर्थ प्रारंभ। सभी भाषाओं के मनुष्य-वाची शब्द मैन, मनुज, मानव, आदम, आदमी आदि सभी मनु शब्द से प्रभावित है। यह समस्त मानव जाति के प्रथम संदेशवाहक हैं। इन्हें प्रथम मानने के कई कारण हैं।
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नारद मुनि का नाम सभी ने सुना है। आओ जानते हैं संक्षिप्त में कि आखिर क्या था उनकी शक्ति का राज और क्या है उनकी कहानी।
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भारत में कलयुग में दो महान संतों का जन्म हुआ है। पहले आदि शंकराचार्य और दूसरे गुरु गोरखनाथ। दोनों के ही कारण धर्म और संस्कृति का पुनरुत्थान हुआ है। यह देश इन दोनों का ऋणि है। आओ जानते हैं गुरु गोरक्षनाथ के जन्म की रोचक कथा। गुरु गोरखनाथ के जन्म के ...
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आचार्य चाणक्य को ही कौटिल्य, विष्णु गुप्त और वात्सायन कहते हैं। उनका जीवन बहुत ही कठिन और रहस्यों से भरा हुआ है। आओ जानते हैं उनके जीवन की संक्षिप्त कहानी।
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महर्षि भृगु के वंश को ही भार्गव वंश कहा गया है। आज भी उनके वंशजों जो संख्या बहुतायत में है। महर्षि भृगु एक महान ऋषि थे। महर्षि भृगु को भी सप्तर्षि मंडल में स्थान मिला है। आओ जानते हैं इसने बारे खास 10 बातें। निम्नलिखिथ जानकारी पुराणों के अलावा ...
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दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या बगलामुखी के बारे में बहुत कम लोग ही जानते होंगे। उनका स्वरूप, मंत्र, साधना, आराधना, पूजा और बगलामुखी भक्ति को क्या वरदान देती है इस संबंध में संक्षिप्त में जानिए।
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हिन्दू धर्म को पुन:व्यवस्थित करके आदिकाल से चली आ रही संत धारा को पुनर्जीवित करने का श्रेय आद्य या आदि शंकराचार्य को जाता है। कहते हैं कि उनका जन्म वैशाख शुक्ल पंचमी को हुआ था। आओ उनके बारे में जानते हैं 8 रोचक जानकारी।
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आदि शंकराचार्य नम्बूद्री ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे। उनके माता-पिता ने उनका नाम शंकर रखा था। शंकर जब बहुत छोटे थे तभी उनके पिता का निधन हो गया था।
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भगवान विष्णु के छठे आवेश अवतार परशुराम की जयंती वैशाख शुक्ल तृतीया को आती है। इस बार यह जयंती 26 अप्रैल 2020 को मनाई जाएगी। आओ जानते हैं भगवान परशुराम कौन थे और क्या है उनकी कहानी।
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ऋषि पराशरजी एक दिव्‍य और अलौकिक शक्ति से संपन्न ऋषि थे। उन्‍होंने धर्मशास्‍त्र, ज्‍योतिष, वास्‍तुकला, आयुर्वेद, नीतिशास्‍त्र, विषयक ज्ञान को प्रकट किया। उनके द्वारा रचित ग्रं‍थ वृहत्‍पराशर होराशास्‍त्र, लघुपराशरी, वृहत्‍पराशरीय धर्म संहिता, पराशर ...
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भक्तमाल के सुप्रसिद्ध टीकाकार प्रियदास के अनुसार संत शिरोमणि सेन महाराज का जन्म विक्रम संवत 1557 में वैशाख कृष्ण-12 (द्वादशी), दिन रविवार को वृत योग तुला लग्न पूर्व भाद्रपक्ष को चन्दन्यायी के घर में हुआ था। बचपन में इनका नाम नंदा रखा गया।
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वल्लभाचार्य के अद्वैतवाद में माया का संबंध अस्वीकार करते हुए ब्रह्म को कारण और जीव-जगत को उसके कार्य रूप में वर्णित कर तीनों शुद्ध तत्वों की साम्यता प्रतिपादित की गई है। इसी कारण ही उनके मत को शुद्धद्वैतवाद कहते हैं।
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हिन्दू ग्रंथ पुराणों में कामदेव की चर्चा होती है। जिस तरह पश्चिमी देशों में क्यूपिड और यूनानी देशों में इरोस को प्रेम का प्रतीक माना जाता है, उसी तरह हिन्दू धर्मग्रंथों में कामदेव को प्रेम और आकर्षण का देवता कहा जाता है। कामदेव आखिर कहां कहां निवास ...
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यह कहानी महाराष्ट्र के महान संत ज्ञानेश्वर से जुड़ी हुई है। ज्ञानेश्वर का जन्म 1275 ईस्वी में महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले में पैठण के पास आपेगांव में भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था। 21 वर्ष की आयु में ही संसार का त्यागकर समाधि ग्रहण कर ली ...
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