रामापीर : चमत्कारिक संत बाबा रामदेव के 5 परचे...

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
बाबा का समाधि स्थल :
रुणिचा में बाबा ने जिस स्‍थान पर समाधि ली, उस स्‍थान पर बीकानेर के राजा गंगासिंह ने भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। इस मंदिर में बाबा की समाधि के अलावा उनके परिवार वालों की समाधियां भी स्थित हैं। मंदिर परिसर में बाबा की मुंहबोली बहन डाली बाई की समाधि, डालीबाई का कंगन एवं राम झरोखा भी स्थित हैं। बाबा ने यहां जिंदा ही समाधि ले ली थी।
श्री बाबा रामदेवजी की समाधि संवत् 1442 को रामदेवजी ने अपने हाथ से श्रीफल लेकर सब बड़े- बूढ़ों को प्रणाम किया तथा सबने पत्र-पुष्प चढ़ाकर रामदेवजी का हार्दिक तन-मन व श्रद्धा से अंतिम पूजन किया। रामदेवजी ने समाधि में खड़े होकर सबके प्रति अपने अंतिम उपदेश देते हुए कहा कि 'प्रतिमाह की शुक्ल पक्ष की दूज को पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन करके पर्वोत्सव मनाना, रात्रि जागरण करना। प्रतिवर्ष मेरे जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में तथा अंतर्ध्यान समाधि होने की स्मृति में मेरे समाधि स्तर पर मेला लगेगा। मेरे समाधि पूजन में भ्रांति व भेदभाव मत रखना। मैं सदैव अपने भक्तों के साथ रहूंगा।' इस प्रकार श्री रामदेवजी महाराज ने समाधि ली।

अगले पन्ने पर कैसे पहुंचे रुणिचा...



और भी पढ़ें :