यहां मिलेंगे आपको साक्षात देवी और देवता

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
हिन्दू धर्म में परमेश्वर (ब्रह्म) को सर्वोच्च शक्ति माना गया है। इसके बाद त्रिदेव और फिर अन्य देवी और देवताओं का स्थान है। उल्लेखनीय है कि 33 प्रकार (करोड़ नहीं) के देवी और देवता होते हैं। ऐसा माना जाता है कि महाभारत काल में देवी और देवता धरती पर विचरण करते थे। कलियुग के प्रारंभ के बाद देवी और देवताओं की विग्रह रूप में पूजा या दर्शन होने लगे।
 
 
विग्रह रूप का अर्थ मूर्ति नहीं। जैसे शिव का विग्रह रूप शिवलिंग और विष्णु का विग्रह रूप शालिग्राम। इसी तरह प्रत्येक देवी और देवताओं के विग्रह रूप हैं जिसमें वे विराजमान रहते हैं।
कहते हैं कि अब देवी और देवता सूक्ष्म रूप में अपने-अपने धाम में रहते हैं। इसके अलावा वे भक्तों की पुकार सुन कहीं भी उपलब्ध हो जाते हैं। हालांकि संतों की मानें तो वे अभी भी धरती के एक मुख्‍य स्‍थान के संपर्क में रहते हैं और वहां वे भक्तों को साक्षात दर्शन देते हैं। लेकिन इसके लिए तीन बातें आपके चरित्र में विद्यमान होना जरूरी है:- पहली सत्य बोलना, दूसरी ईश्‍वर प्राणिधान और तीसरी प्रतिदिन संध्यावंदन। आओ जानते हैं कि आखिर देवी और देवता हमें कहां दर्शन दे सकते हैं अगले पन्ने पर...
 



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